
पटना। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश के बहराइच में प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति अंतिम समय में रद्द किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। कार्यक्रम निरस्त होने से नाराज सहनी बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ सीधे जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय पहुंच गए और प्रशासन की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया।डीएम कार्यालय पहुंचकर मुकेश सहनी ने अधिकारियों से कार्यक्रम रद्द करने का स्पष्ट कारण पूछा और मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। सहनी ने दावा किया कि उनकी पार्टी का कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। वहां न तो कोई रोड शो प्रस्तावित था और न ही कोई बड़ी रैली, जिससे कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति उत्पन्न होती। उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहता तो सीमित पुलिस बल की तैनाती के साथ आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न कराया जा सकता था, लेकिन ऐन मौके पर अनुमति वापस ले ली गई।वीआईपी प्रमुख ने इस कदम को लोकतंत्र का उल्लंघन करार देते हुए आरोप लगाया कि यह निषाद, पिछड़े, दलित और वंचित समाज की आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और शांतिपूर्ण कार्यक्रमों को रोकना अधिकारों का सीधा हनन है। सहनी ने कहा कि बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने के बाद ही प्रशासन ने कार्यक्रम रद्द करने का फैसला लिया।मुकेश सहनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो पार्टी कार्यकर्ता अपना आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निषाद और वंचित समाज को उनके अधिकार तथा आरक्षण नहीं मिले, तो आगामी 2027 के चुनाव में भाजपा के खिलाफ व्यापक राजनीतिक अभियान चलाया जाएगा।पहले भी कार्यक्रमों को किया गया है बाधितसहनी ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में उनके कार्यक्रमों को बाधित करने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व लखनऊ में भी उन्हें कई दिनों तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) रखा गया था और विभिन्न जिलों में पार्टी की गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया गया था। उनका कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष की मुख्य भूमिका सरकार से सवाल पूछना और जनता की आवाज उठाना है। प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी वंचितों के सम्मान की लड़ाई आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेगी और किसी भी दबाव के आगे पीछे नहीं हटेगी।



