
पटना। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अजब खेल चल रहा है। खुद को भ्रष्टाचार का ‘डॉक्टर’ बताने वाले विभागीय मंत्री दिलीप जायसवाल की कथनी और करनी का अंतर अब खुलकर सामने आ गया है। जिस अधिकारी को मंत्री ने ‘एंटीबायोटिक’ देकर लूप लाइन (संटिंग) में भेजा था और जिसके खिलाफ बाकायदा चार्जशीट को मंजूरी दी थी, उसे चंद दिनों बाद ही वापस उसी मलाईदार कुर्सी पर बैठा दिया गया है। इस घटना ने विभाग की ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।यह पूरा मामला पटना जिले के पालीगंज अंचल से जुड़ा है। यहां के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) महेश कुमार पर लगे गंभीर आरोपों के बाद विभाग ने 30 जून को उन्हें पद से हटा दिया था। कार्रवाई करते हुए उन्हें शिवहर में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के रूप में संटिंग पोस्टिंग दी गई थी।इसके बाद 20 जुलाई को मंत्री दिलीप जायसवाल ने मीडिया में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कार्रवाई का ढिंढोरा पीटा। मंत्री ने बताया था कि बोधगया में सीओ रहते हुए बीएलटी के आदेश का अनुपालन न करने और अनियमितता बरतने के आरोप में महेश कुमार के खिलाफ आरोप-पत्र (चार्जशीट) गठित करने की स्वीकृति दे दी गई है।’एंटीबायोटिक’ का गजब असर, 17 दिन में ही दागी अधिकारी हुआ ‘पाक-साफ’विवाद का असली कारण 6 अगस्त को जारी हुआ वह आदेश है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। 20 जुलाई को जिस अधिकारी पर आरोप-पत्र गठित करने की बात मंत्री ने सार्वजनिक की थी, 6 अगस्त को उसी अधिकारी पर विभाग अचानक मेहरबान हो गया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 6 अगस्त को जारी 20 अधिकारियों की स्थानांतरण सूची में महेश कुमार को एक बार फिर से पालीगंज का ही सीओ नियुक्त कर दिया गया।आरोप लगने के बाद हटाना, फिर चार्जशीट देना और महज एक महीने के भीतर उसी आरोपित अधिकारी की उसी अंचल में वापसी ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।ज्ञात हो कि दागी सीओ पर कार्रवाई के वक्त राजस्व मंत्री डॉ. जायसवाल ने बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि उनके द्वारा अब तक 67 भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें दाखिल-खारिज में अनियमितता और अनुशासनहीनता के मामले शामिल हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा था कि जनता के हितों से खिलवाड़ और सरकारी कार्यों में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्रवाई का उद्देश्य राजस्व प्रशासन में ‘पारदर्शिता और जवाबदेही’ लाना बताया गया था।अब उठ रहे हैं ये सवाल: अगर अधिकारी दागी था, तो उसे वापस उसी पद पर क्यों भेजा गया? क्या दिखावे के लिए अधिकारियों को हटाया जाता है और मामला शांत होते ही वापस उसी जगह तैनात कर दिया जाता है? क्या मंत्री दिलीप जायसवाल भ्रष्टाचार खत्म करने का इलाज कर रहे हैं या करप्शन को और बढ़ावा देने का? फिलहाल, पालीगंज सीओ की इस ‘चमत्कारी वापसी’ ने प्रशासनिक महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में हलचल मचा दी है। जनता अब पूछ रही है कि मंत्री जी का यह कैसा ‘एंटीबायोटिक’ है, जो दागी अधिकारियों को सजा देने के बजाय उन्हें फिर से मलाईदार पदों पर स्थापित कर देता है।



