
नई दिल्ली। रेलवे के होटलों के आवंटन से जुड़े बहुचर्चित आईआरसीटीसी धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से लालू परिवार को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी है। अदालत ने मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर अपना फैसला सोमवार को एक बार फिर टाल दिया। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत 10 सितंबर 2026 को अपना अहम आदेश सुनाएगी, जिस पर पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट में पिछले काफी समय से इस मामले में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सुनवाई चल रही है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने बचाव और अभियोजन (ईडी) दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश पूर्व में ही सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, इसके बाद से फैसले की तारीख लगातार आगे खिसक रही है। 13 फरवरी को शुरू हुआ तारीखों का यह सिलसिला 6 मई, 22 मई, 9 जून, 16 जुलाई, 31 जुलाई और 14 अगस्त से होते हुए 29 अगस्त तक पहुंचा था। 29 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने 7 सितंबर की अगली तारीख मुकर्रर की थी, लेकिन सोमवार को भी फैसला नहीं आ सका। अब मामले की अगली दिशा 10 सितंबर को तय होगी।
महीनों से टल रहा है अदालत का फैसला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोप पत्र में लालू प्रसाद यादव के परिवार के कई अहम सदस्य शामिल हैं। जांच एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राज्यसभा सांसद मीसा भारती, हेमा यादव और तेज प्रताप यादव को मुख्य रूप से आरोपी बनाया है। इनके अलावा सरला गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथमल काकरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी और देवकी नंदन तुलस्यान समेत कुल 16 लोगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नामजद किया गया है। जांच के घेरे में मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सुजाता होटल्स और अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
क्या है आईआरसीटीसी होटल घोटाला?
यह पूरा मामला यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल (2004-2009) का है, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। केंद्रीय जांच एजेंसियों के अनुसार, आईआरसीटीसी के नियंत्रण वाले रांची और पुरी के दो होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका निजी कंपनियों को सौंपने में भारी अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर सुजाता होटल्स जैसी चहेती कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके एवज में लालू परिवार को पटना के प्रमुख इलाकों में बेनामी संपत्तियां और अन्य आर्थिक लाभ प्राप्त हुए।सीबीआई ने इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत टेंडर में हेराफेरी का मुकदमा दर्ज किया था। इसी आधार पर ईडी ने अपराध से अर्जित अवैध धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) और मनी ट्रेल को खंगालते हुए धनशोधन अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी अलग चार्जशीट दाखिल की है।अब देखना यह है कि 10 सितंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट आरोप तय करने पर क्या कड़ा रुख अपनाती है। यदि अदालत द्वारा आरोप तय कर दिए जाते हैं, तो मामले का नियमित ट्रायल (मुकदमा) शुरू हो जाएगा, जिसका सीधा असर बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।



