
पटना (राज्य ब्यूरो)। बिहार के सरकारी महकमों में अब पुरानी ढर्रे की कार्यप्रणाली नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और कंप्यूटर से दूरी बनाए रखने वाले कर्मचारियों, विशेषकर विधायकों के सहयोगियों (पीए) को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। गुरुवार को राजधानी में आयोजित ‘एआई समिट’ (AI Summit) को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सरकारी व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और हाईटेक बनाने का कड़ा संदेश दिया।विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से सीधा आग्रह करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि जिस प्रकार विधायकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम होते हैं, उसी तर्ज पर विधानसभा कर्मियों और सहयोगियों के लिए भी नियमित ट्रेनिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि विधायक अपना काम आसान करने के लिए सहयोगी रखते हैं। ऐसे में यदि किसी पीए (निजी सहायक) को अपने विधायक से भी कम कंप्यूटर आता है, तो यह स्थिति कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया कि हर दो महीने में प्रशिक्षण कक्षाएं लगाई जाएं। जो लोग तकनीक नहीं सीख पा रहे हैं, उन्हें प्रशिक्षित किया जाए, और यदि फिर भी वे सक्षम नहीं होते हैं, तो उन्हें हटा दिया जाए।मुख्यमंत्री ने केवल कंप्यूटर ज्ञान तक सीमित न रहते हुए सोशल मीडिया साक्षरता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में कर्मचारियों को फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्मों की कार्यप्रणाली को गहराई से समझना होगा।
सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और सीधा संवाद स्थापित करने के लिए सरकारी तंत्र का डिजिटल रूप से दक्ष होना अनिवार्य है। जैसे आईएएस अधिकारी मंत्रियों की मदद करते हैं, वैसे ही सहयोगी स्टाफ को भी डिजिटल दुरुपयोग और फेक नैरेटिव पर चिंतासमिट में मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज ऐसे कई तकनीकी टूल्स मौजूद हैं, जिनके जरिये घर बैठे बिना किसी वास्तविक जनाधार के हजारों फेक कमेंट्स और प्रतिक्रियाएं दिखाई जा सकती हैं। पारंपरिक प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अखबारों की खबरों को लोग प्रामाणिक मानते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण की बातें तेजी से फैलती हैं और लाखों लोग उस पर विश्वास कर लेते हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भ्रामक स्थिति, फेक नैरेटिव और डिजिटल चुनौतियों से निपटने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और आधुनिक तकनीक का ही सहारा लेना होगा। मुख्यमंत्री का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहार सरकार अब अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से तकनीक-आधारित और ‘डिजिटल बिहार’ के विजन के अनुरूप ढालने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।



