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क्या बिहार में फिर बदलेंगे सियासी समीकरण? नीतीश को RJD का ऑफर, NDA में भी मतभेद

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार भले ही अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं हैं, लेकिन राज्य की सियासत में उनका असर अब भी कायम है। इसी बीच आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र के एक बयान ने एक बार फिर बिहार में संभावित सियासी उलटफेर की चर्चा छेड़ दी है।भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार से बीजेपी और एनडीए का साथ छोड़कर आरजेडी के समर्थन से सरकार बनाने की अपील की है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग रुख सामने आ रहे हैं। आरजेडी ने साफ कहा है कि अगर नीतीश एनडीए से अलग होते हैं तो पार्टी उन्हें सरकार बनाने में समर्थन देने को तैयार है।

हालांकि, इस बयान को अभी गठबंधन बदलने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल जेडीयू की ओर से एनडीए छोड़ने की कोई घोषणा नहीं हुई है। इसके उलट पार्टी UCC जैसे मुद्दों पर अपनी अलग स्थिति जरूर रख रही है। जेडीयू ने कहा है कि वह प्रस्तावित कानून का अध्ययन करने के बाद अपना रुख तय करेगी।

नीतीश और गठबंधन की पुरानी कहानी

नीतीश कुमार की राजनीति में गठबंधन बदलना कोई नई बात नहीं है। 2013 में उन्होंने बीजेपी से रिश्ता तोड़ा। 2017 में आरजेडी के साथ महागठबंधन छोड़कर दोबारा एनडीए में लौटे। 2022 में उन्होंने फिर बीजेपी का साथ छोड़ा और आरजेडी के साथ सरकार बनाई। इसके बाद जनवरी 2024 में एक बार फिर एनडीए में वापसी की।इसी राजनीतिक इतिहास की वजह से आरजेडी के मौजूदा ऑफर ने चर्चाओं को हवा दी है। लेकिन इस समय हो रहे संकेतों से इतना ही कहा जा सकता है कि आरजेडी ने राजनीतिक प्रस्ताव जरूर रखा है; गठबंधन बदलने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

अब नीतीश नहीं, सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री

बिहार की मौजूदा तस्वीर पहले से काफी बदल चुकी है। अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और बाद में राज्यसभा पहुंचे। इसके बाद बीजेपी के सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभाला। यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नीतीश किस गठबंधन के साथ हैं, बल्कि यह भी है कि जेडीयू भविष्य में अपनी राजनीतिक भूमिका किस तरह तय करती है।

इसी बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और जेडीयू के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं भी तेज हुई हैं। निशांत ने 2026 में विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार के तौर पर राजनीति में औपचारिक कदम रखा।

फरक्का मुद्दे पर भी बीजेपी-जेडीयू के बीच अलग सुर

गंगा जल बंटवारे से जुड़े 1996 के भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते यानी फरक्का संधि को लेकर भी बिहार की एनडीए सरकार और जेडीयू की तरफ से केंद्र पर दबाव बनाया गया है। जेडीयू नेता संजय कुमार झा ने समझौते के नवीनीकरण को लेकर केंद्र से बिहार के हितों को ध्यान में रखने की मांग की है।यानी बिहार में फिलहाल तस्वीर दिलचस्प है—एक तरफ आरजेडी नीतीश कुमार को एनडीए छोड़ने का खुला ऑफर दे रही है, दूसरी तरफ जेडीयू कुछ मुद्दों पर बीजेपी से अलग रुख रख रही है।

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