
मोतिहारी। में सस्ती जमीन के लालच में आकर बिना पूरी पड़ताल किए जमीन खरीदने वालों की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। मौजा बैरिया स्थित खाता संख्या 109 की बेशकीमती सरकारी गैरमजरूआ जमीन की जमाबंदी को लेकर जिला प्रशासन ने अपना डंडा चला दिया है। एडीएम मुकेश सिन्हा ने जमीन के रिकॉर्ड की खुद जांच कर रिपोर्ट से गायब किए गए नामों की सूची तत्काल तलब की है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद भू-माफियाओं के साथ-साथ उन लोगों में भी हड़कंप मच गया है, जिन्होंने चीनी मिल की जमीन समझकर सरकारी जमीन खरीद ली थी।बैरिया क्षेत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज के होने के कारण यहां जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। आरोप है कि भू-माफियाओं ने इसी का फायदा उठाते हुए खाता संख्या 109 के तहत आने वाली लगभग 500 एकड़ सरकारी गैरमजरूआ जमीन के एक बड़े हिस्से को ‘चीनी मिल’ की संपत्ति बताकर भोले-भाले लोगों को बेच दिया। लोग सस्ती जमीन के चक्कर में फंसते गए और भू-माफिया अपनी जेबें भरते रहे।इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात निचले स्तर के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल हैं। डीएम सौरभ सुमन यादव के निर्देश पर अंचल अधिकारी (CO) ने सरकारी जमीन की जमाबंदी रद्द करने के लिए जो प्रस्ताव एडीएम न्यायालय में भेजा, उसमें केवल 38 लोगों की जमाबंदी रद्द करने की बात थी।जब मामले की जानकारी एडीएम मुकेश सिन्हा को मिली, तो उन्होंने खुद अपने कंप्यूटर पर ऑनलाइन रिकॉर्ड खंगाला। जांच में सामने आया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में 48 लोगों के नाम पर जमाबंदी दर्ज है। इसे देखते ही एडीएम ने सीओ से सख्त लहजे में जवाब तलब किया कि बाकी 10 लोगों के नाम रिपोर्ट में क्यों शामिल नहीं किए गए। उन्होंने उसी दिन छूटे हुए लोगों की पूरी सूची उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश दिया है।एडीएम ने स्पष्ट किया है कि मौजा बैरिया के खाता संख्या 109 की करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन को सेंट्रल यूनिवर्सिटी को हस्तांतरित (Transfer) किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में जिन लोगों ने माफियाओं के झांसे में आकर यहां अपनी गाढ़ी कमाई लगाई है, उनकी जमीन छिनना और परेशानी बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से पूरे इलाके में भू-माफिया भूमिगत होने लगे हैं।



