
बेगूसराय। जिले में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की भयावह होती स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बेगूसराय पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री सह स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह भी मौजूद रहे। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने भारी प्रशासनिक अमले, आला अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ उलाव स्थित कैलाशपुर मोड़ पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जमीनी स्तर पर मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने की सख्त हिदायत दी।निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बाढ़ की मौजूदा स्थिति, पानी के फैलाव वाले नए क्षेत्रों और अब तक चलाए गए राहत-बचाव कार्यों की बिंदुवार जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए। प्रशासनिक स्तर पर नावों की पर्याप्त व्यवस्था, स्वास्थ्य शिविरों का संचालन, सूखा राशन और शुद्ध पेयजल जैसी हर जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए।
राहत और बचाव कार्यों में कोताही बर्दाश्त नहीं
वीआईपी दौरे को लेकर पूरा प्रशासनिक महकमा हाई अलर्ट पर रहा। ग्राउंड जीरो पर हालात का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सीधे आईओसीएल गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी सहित तमाम आला अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति पर एक गहन समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्य रूप से बाढ़ प्रभावित इलाकों में बांटी जा रही राहत सामग्री, सुरक्षित आवागमन के साधन, मेडिकल टीमों की तैनाती, पशुओं के लिए चारे की पर्याप्त व्यवस्था और अन्य बुनियादी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
आईओसीएल गेस्ट हाउस में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
जायजा लेने के बाद सम्राट चौधरी ने हालात की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गंगा नदी से करीब 20 लाख क्यूसेक पानी गुजर रहा है। इसके साथ ही, सोन नदी में भी करीब साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो निश्चित रूप से एक बड़ी चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन सभी जगहों पर पूरी तरह अलर्ट है। आम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।बाढ़ की चिरस्थायी समस्या के समाधान पर मुख्यमंत्री ने सरकार का विजन स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण की स्थायी व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया गया है। अभी तक सरकार का मुख्य फोकस कोसी और गंडक नदियों पर था, लेकिन अब गंगा नदी के प्रबंधन को लेकर भी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। गंगा के तटबंधों (इनबेंकमेंट) को हर हाल में दुरुस्त किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार संवेदनशील जगहों पर नए रिंग बांध और स्पर बनाए जाएंगे।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कई जगहों पर गंगा का पानी 20-20 किलोमीटर तक के विस्तृत इलाके में फैल रहा है, जिससे भारी तबाही होती है। राज्य सरकार अब इस जल फैलाव को सीमित और व्यवस्थित करने की दिशा में वैज्ञानिक तरीके से काम करेगी। इससे न केवल बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि नदी के तल में लगातार जमा हो रही गाद की गंभीर समस्या से भी भविष्य में बड़ी राहत मिल सकेगी।



