
पटना। बिहार में उफनती गंगा अब मैदानी इलाकों में जमकर कहर बरपाने लगी है। मोकामा प्रखंड में गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर खेतों की मेड़ तोड़कर अब सीधे गांवों और घरों में प्रवेश कर गया है। बाढ़ के इस भीषण प्रकोप से शिवनार, बरहपुर और मोर इंग्लिश समेत कई गांवों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बाढ़ का पानी पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-31) बायपास तक पहुंच गया है। मुख्य सड़क पर पानी आ जाने से न केवल यातायात बाधित हुआ है, बल्कि ग्रामीणों के लिए दैनिक जरूरत के काम करना भी पहाड़ जैसी चुनौती बन गया है। गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। खेतों में लहलहाती फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और अब पानी लोगों की दहलीज लांघ कर कमरों तक पहुंच गया है। पशुओं के चारे से लेकर पीने के शुद्ध पानी तक का संकट गहराने लगा है। मोकामा में गंगा का पानी जिस तेजी से मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है, उसने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
घरों में घुसा पानी, खौफ में ग्रामीण
बाढ़ की इस भयावह स्थिति की सूचना मिलते ही मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने तत्काल प्रभावित इलाकों का सघन दौरा किया। अपने काफिले के साथ पहुंचे विधायक ने शिवनार, बरहपुर और मोर इंग्लिश के ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी पीड़ा सुनी। उन्होंने ग्रामीणों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़े हैं। विधायक ने कहा कि राहत कार्यों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दौरे के दौरान विधायक ने प्रभावितों के लिए चलाए जा रहे ‘सामुदायिक रसोई’ (कम्युनिटी किचन) का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां बन रहे भोजन की गुणवत्ता परखी और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बाढ़ के दौरान जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए उन्होंने मेडिकल कैंप, स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता की भी समीक्षा की ताकि समय रहते मरीजों का इलाज हो सके।
आने वाले कुछ घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण
स्थानीय प्रशासन राहत व बचाव कार्य पर पैनी नजर बनाए हुए है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। हालांकि, यदि गंगा के जलस्तर में इसी तरह उफान जारी रहा, तो हालात और भी बेकाबू हो सकते हैं। आने वाले कुछ घंटे मोकामा के इन बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



