
उत्तर प्रदेश एटीएस ने पाकिस्तान फंडिंग के कथित मामले में बिहार के पूर्णिया निवासी मोहम्मद जफर को मेरठ से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, जफर के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद से कथित संबंध सामने आए हैं और उस पर पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क को आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप है। रविवार को गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ के आधार पर एजेंसी अब मामले से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की जांच कर रही है।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम भेजने का आरोप
एटीएस के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पाकिस्तान से जुड़े एक नंबर पर रकम ट्रांसफर की थी। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि रकम का स्रोत क्या था, पैसा किस नेटवर्क से आया और पाकिस्तान में यह राशि आखिर किसके पास पहुंची।
एजेंसी डिजिटल ट्रांजैक्शन, संबंधित वॉलेट और आरोपी के संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
चंदे की रकम को लेकर भी जांच
जांच एजेंसी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक संदिग्ध नेटवर्क के सक्रिय होने और मदरसे के नाम पर चंदा जुटाकर पाकिस्तान भेजे जाने की सूचना मिलने का दावा किया गया है। इसके बाद जांच आगे बढ़ाई गई।
एटीएस का कहना है कि शुरुआती जांच में कथित तौर पर चंदे की रकम जैश-ए-मुहम्मद से जुड़े लोगों तक पहुंचने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी।
सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर
एटीएस के अनुसार, जफर कथित तौर पर जैश-ए-मुहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भाषणों से प्रभावित था। एजेंसी का आरोप है कि वह सोशल मीडिया पर अजहर के कथित भड़काऊ और जेहादी भाषण साझा करता था।
जांच एजेंसी आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या इस नेटवर्क में अन्य संदिग्ध भी शामिल हैं।
पूर्णिया का रहने वाला है आरोपी
एटीएस के मुताबिक, मोहम्मद जफर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया का रहने वाला है। उसने मेरठ के एक मदरसे में पढ़ाई की थी। एजेंसी का दावा है कि इसी दौरान उसे जैश-ए-मुहम्मद के बारे में जानकारी मिली।
पूछताछ में उसके मेरठ से जुड़े रहने की बात सामने आई है। वह मेरठ के अलावा हापुड़ और आसपास के इलाकों में भी अलग-अलग स्थानों पर रहने या आने-जाने की बात जांच में सामने आई है।
बिहार से पाकिस्तान तक कथित नेटवर्क की पड़ताल
अब एटीएस के सामने जांच का दायरा केवल जफर तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित फंडिंग चैनल, डिजिटल लेन-देन, सोशल मीडिया संपर्कों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसके संभावित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित तौर पर चंदा कहां से जुटाया जाता था, उसे किस माध्यम से पाकिस्तान भेजा जाता था और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
कोर्ट ने भेजा जेल
एटीएस ने आरोपी को सोमवार को लखनऊ की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। एजेंसी के अनुसार पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच जारी है।
फिलहाल इस मामले में सामने आए सभी आरोप जांच के अधीन हैं। जांच पूरी होने के बाद ही कथित फंडिंग, आतंकी संगठन से संबंध और नेटवर्क से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



