
मोतिहारी। चिरैया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पताही प्रखंड की बखरी पंचायत स्थित इनरवाबारी (चम्पापुर) गांव में उस वक्त कोहराम मच गया, जब दिल्ली में मजदूरी करने गए गांव के ही एक होनहार युवक की मौत की मनहूस खबर परिजनों को मिली। 28 वर्षीय चंदन सिंह राजपूत, जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने और भरण-पोषण के उद्देश्य से महज डेढ़ महीने पहले ही दिल्ली गए थे, वहां एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को दिल्ली में एक मकान में पेंटिंग करने के दौरान अचानक सीढ़ी टूट जाने से चंदन ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। इस हृदयविदारक हादसे में गंभीर चोटें आने के कारण मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।जैसे ही यह दुखद समाचार पताही स्थित उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग भी उनके दरवाजे की ओर दौड़ पड़े। घटना के बाद से मृतक की पत्नी रानी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है, वह बार-बार बेसुध हो रही हैं। वहीं, वृद्ध पिता लक्ष्मी सिंह अपने जवान बेटे की मौत की खबर सुनकर पूरी तरह से टूट चुके हैं। बताया जाता है कि चंदन तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उन्हीं के मजबूत कंधों पर था। वर्ष 2018 में उनकी शादी हुई थी और उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। अब इन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है और इस गरीब परिवार के सामने रोजी-रोटी का एक गहरा संकट खड़ा हो गया है।
सीढ़ी टूटने से हुआ हादसा
रोजगार के अभाव में बिहार और विशेषकर पूर्वी चंपारण जिले से हर साल हजारों की संख्या में युवा पलायन कर दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में मजदूरी करने जाते हैं। चंदन भी उन्हीं युवाओं में से एक थे जो अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर परदेस गए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। दिल्ली से कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब चंदन का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव इनरवाबारी लाया गया, तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। शव देखते ही परिजनों का जो क्रंदन फूट पड़ा, उसने वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। दुःख की इस घड़ी में गांव के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।शुक्रवार को भारी गमगीन माहौल में चंदन सिंह की अंतिम शव यात्रा निकाली गई, जिसमें गांव और पंचायत के सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दुःखद घड़ी में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी शामिल हुए। एक साथी और पत्रकार के तौर पर मैंने स्वयं भी उनके पैतृक गांव पहुंचकर अंतिम शव यात्रा में हिस्सा लिया और उस होनहार युवा को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शोकाकुल परिजनों तथा अंतिम यात्रा में शामिल साथियों से मिलकर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान परिवार की दयनीय स्थिति और छोटे-छोटे अनाथ हुए बच्चों को देखकर मन अत्यंत व्यथित हो उठा।
प्रशासन से मुआवजे की गुहार
अंतिम संस्कार के दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन और बिहार सरकार से पुरजोर मांग की है कि इस गरीब और असहाय हो चुके परिवार को तत्काल उचित सरकारी मुआवजा प्रदान किया जाए। लोगों ने कहा कि प्रवासी मजदूर दुर्घटना बीमा और पारिवारिक लाभ योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि अविलंब पीड़ित परिवार को दी जाए, ताकि मृतक की पत्नी और उनके तीन छोटे बच्चों के भविष्य और भरण-पोषण का कुछ सहारा मिल सके। पूरा क्षेत्र ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में सर्वोच्च स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!



