
उत्तर बिहार और मिथिलांचल के करोड़ों लोगों का वर्षों पुराना सपना अब बहुत जल्द हकीकत की जमीन पर उतरने जा रहा है। दरभंगा में प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो गया है। इस बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य परियोजना को गति देते हुए 1549.25 करोड़ रुपये की निविदा (टेंडर) जारी कर दी गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में उठाए गए इस अहम कदम के साथ ही दरभंगा सहित आसपास के दर्जनों जिलों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह विश्वस्तरीय अस्पताल दरभंगा जिले के शोभन बाईपास इलाके में लगभग 182 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। इस चिकित्सा संस्थान के बन जाने से न केवल बिहार, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के मरीजों को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर के बिल्कुल नजदीक सुलभ हो सकेंगी।
नेपाल के मरीजों के लिए वरदान और रोजगार के नए अवसर
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए एचएससीसी (इंडिया) लिमिटेड की ओर से टेंडर जारी किया गया है। पूरी परियोजना को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल के आधार पर तैयार किया जाएगा। जारी निविदा दस्तावेजों के अनुसार, एम्स निर्माण में रुचि रखने वाली अनुभवी और योग्य निर्माण एजेंसियां आगामी 27 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकती हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन के बाद चयनित एजेंसी को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। निर्माण एजेंसी का अंतिम रूप से चयन होने और कार्यादेश जारी होने के बाद, इस पूरे अस्पताल परिसर को 30 महीने की सख्त समयसीमा के भीतर तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ईपीसी मॉडल के तहत बनने वाले इस एम्स परिसर में मुख्य रूप से एक विशाल और अत्याधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भवन का निर्माण होगा। मरीजों के इलाज के साथ-साथ यहाँ मेडिकल और नर्सिंग की उच्च स्तरीय पढ़ाई के लिए एक शानदार अकादमिक ब्लॉक, रिसर्च सेंटर और प्रशासनिक भवन भी बनाया जाएगा। डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल छात्रों के लिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर (हॉस्टल और स्टाफ क्वार्टर) इसी 182 एकड़ के दायरे में विकसित किए जाएंगे। मरीजों और उनके परिजनों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए विश्राम गृह, चौड़ी सड़कें, पार्किंग, कैफेटेरिया और ग्रीन जोन जैसी बुनियादी जरूरतें भी इस प्रोजेक्ट का अभिन्न हिस्सा होंगी। भौगोलिक दृष्टिकोण से दरभंगा का एम्स नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के लिए भी एक बड़े वरदान के रूप में साबित होगा। इसके साथ ही, यह परियोजना आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से मील का पत्थर बनेगी। एम्स के सुचारू संचालन से हजारों की संख्या में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल और तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे। शोभन और उसके आसपास के इलाकों में दवा की दुकानें, होटल, और ट्रांसपोर्टेशन जैसे व्यवसाय तेजी से पनपेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी। अब सबकी निगाहें 27 नवंबर को टेंडर प्रक्रिया के पूरा होने पर टिकी हैं।



