
इक्कीसवीं सदी में जहां एक ओर समाज आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहा है और देश का कानून बालिग युवक-युवतियों को अपना जीवनसाथी चुनने की पूरी आजादी देता है, वहीं बिहार से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जो सामाजिक संकीर्णता की गवाही दे रही है। यहां एक पिता ने अपनी बेटी के अंतर्जातीय प्रेम विवाह करने से क्षुब्ध होकर न सिर्फ उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए, बल्कि हिंदू रीति-रिवाज के साथ सिर मुंडवाकर अपनी जीवित बेटी का बाकायदा श्राद्धकर्म और पिंडदान भी कर दिया। जानकारी के अनुसार, युवती और युवक एक ही क्षेत्र के रहने वाले हैं। लड़की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर और अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपने पति के साथ पिछले 11 सालों से रिलेशनशिप में थी। दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं और साथ जीवन बिताना चाहते थे। लेकिन उनके इस रिश्ते के बीच जाति की एक बड़ी दीवार खड़ी थी। लड़की ने बताया कि उसका पति निचली जाति से ताल्लुक रखता है, जिसके कारण उसके घर वाले इस शादी के सख्त खिलाफ थे। परिजनों को लाख मनाने के बावजूद जब वे नहीं पसीजे, तो अंततः दोनों ने घर से बगावत कर अपनी मर्जी से विवाह रचा लिया। जैसे ही बेटी के घर से भागकर दूसरी जाति में शादी करने की खबर परिजनों को लगी, घर में कोहराम मच गया। पिता और भाई ने बेटी के इस स्वावलंबी कदम को परिवार की ‘झूठी प्रतिष्ठा’ और सामाजिक मान-मर्यादा पर सीधा हमला माना। समाज और बिरादरी में तथाकथित रूप से नाक कट जाने के भय और आक्रोश में आकर पिता ने एक ऐसा खौफनाक फैसला लिया, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। पिता और भाई ने गांव के समीप ही पूरे विधि-विधान के साथ अपना मुंडन करवाया और पुरोहित को बुलाकर अपनी जीवित बेटी का पिंडदान कर दिया।
पुलिस प्रशासन की नजर, कानूनी मान्यता
उन्होंने भरे समाज में यह ऐलान कर दिया कि उनके लिए अब उनकी बेटी मर चुकी है और आज से उनका उससे कोई वास्ता नहीं है। इस अजब-गजब और रूह कंपा देने वाली घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव में लोगों की राय भी दो फाड़ हो गई है। एक तबका, जो रूढ़िवादी सोच का समर्थक है, वह पिता के इस कृत्य को परिवार के सम्मान और लाचारी से जोड़कर देख रहा है। वहीं, समाज के प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं का स्पष्ट कहना है कि जब दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं, तो झूठी शान के नाम पर जीवित संतान का श्राद्ध कर देना घोर अमानवीय और असंवैधानिक कृत्य है। इस पूरे प्रकरण में कानूनी पहलू पूरी तरह से नवविवाहित जोड़े के पक्ष में है। कानूनविदों का कहना है कि दोनों के बालिग होने के कारण यह विवाह पूरी तरह वैध है। हालांकि, शुरुआत में लड़की के परिवार की तरफ से अपहरण या बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप भी लगाया गया था, जिसे लड़की ने वीडियो जारी कर पूरी तरह से खारिज कर दिया है। लड़की का स्पष्ट कहना है कि उस पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है और वह अपनी शादी से बेहद खुश है। पुलिस प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है ताकि तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर कब तक झूठी शान की वेदी पर बेटियों की खुशियों की बलि दी जाती रहेगी।



