
पटना। बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर कुदरत के कहर और बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही है। पटना के सीमांत और निचले इलाकों में पुनपुन नदी का उफान अब विकराल रूप धारण कर चुका है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर बस्तियों और कॉलोनियों को अपनी चपेट में लेने के बाद, अब शहर के बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कारोबारों को भी लीलने लगा है। बाढ़ के पानी ने पटनावासियों के जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है और ताजा हालात इस बात की गवाही दे रहे हैं कि स्थिति तेजी से बेकाबू होती जा रही है।बाढ़ की सबसे भयावह और हैरान करने वाली तस्वीर पटना के दीदारगंज इलाके से सामने आई है, जिसने तबाही की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है। दीदारगंज स्थित एक विशाल ट्रैक्टर शोरूम का यार्ड रातों-रात बाढ़ के पानी में डूब गया। जानकारी के अनुसार, यार्ड में खड़े हजारों नए और चमचमाते ट्रैक्टर अब बाढ़ के मटमैले पानी की चपेट में आ गए हैं। अचानक पानी का रेला शोरूम परिसर में दाखिल हुआ, जिससे प्रबंधन और वहां मौजूद कर्मचारियों के बीच भारी अफरा-तफरी मच गई। करोड़ों रुपये की लागत वाले इन कृषि वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का कोई भी मौका कर्मचारियों को नहीं मिल सका।
पुनपुन के उफान से कांपा दीदारगंज
ड्रोन कैमरों से ली गई तस्वीरों और वीडियो ने इस तबाही का खौफनाक मंजर कैद किया है। ऊपर से देखने पर शोरूम का पूरा यार्ड एक विशाल झील में तब्दील नजर आ रहा है। जिधर भी नजर दौड़ाएं, सिर्फ और सिर्फ बाढ़ का गंदा पानी ही दिखाई दे रहा है। इस अथाह जलराशि के बीच नए ट्रैक्टर ऐसे फंसे हुए हैं, मानो किसी टापू पर बेबस खड़े हों। एक कृषि प्रधान राज्य में इन ट्रैक्टरों का डूबना सीधे तौर पर बड़े आर्थिक नुकसान का संकेत है, क्योंकि आगामी सीजन के लिए ही इस भारी स्टॉक को यार्ड में मंगाकर रखा गया था।पुनपुन नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने पटना के ग्रामीण और शहरी, दोनों ही क्षेत्रों में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। कई इलाकों में सड़कों पर नाव चलने की नौबत आ गई है और लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गई हैं। जलजमाव और पानी का फैलाव इतना अधिक है कि लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो गया है और अब पीने के पानी से लेकर राशन तक का संकट गहराने लगा है।
रातों-रात डूबा ट्रैक्टर शोरूम
दीदारगंज का यह जलमग्न यार्ड इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पटना में जल निकासी की व्यवस्था और बाढ़ प्रबंधन के दावे धरातल पर कितने नाकाफी हैं। पुनपुन नदी के इस उग्र रूप के बीच, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों से पानी की निकासी सुनिश्चित करना और जलमग्न इलाकों में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द राहत और बचाव सामग्री पहुंचाना है। पटनावासी अब आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब यह जल प्रलय शांत हो और उनकी जिंदगी दोबारा पटरी पर लौट सके।



