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पूर्वी चंपारण में 56 करोड़ के साइबर फ्रॉड की साजिश नाकाम, इंटरनेशनल गिरोह के नौ शातिर गिरफ्तार

पटना। तकनीक के इस दौर में साइबर अपराधी आए दिन ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। लेकिन पूर्वी चंपारण जिले की मोतिहारी पुलिस ने एक ऐसे बड़े इंटरनेशनल साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसकी साजिश सुनकर खुद पुलिस अधिकारियों के भी कान खड़े हो गए। इस शातिर गिरोह ने ‘कैंप सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी के बैंक खाते में जमा करीब 56 करोड़ रुपये हैक कर दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी। हालांकि, समय रहते मोतिहारी साइबर थाना पुलिस को इसकी भनक लग गई। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र में छापेमारी कर इस बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले ही नौ आरोपितों को रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया।

बैंककर्मियों की मिलीभगत से हासिल करते थे डेटा

पकड़े गए अपराधियों से पूछताछ और पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस पूरे खेल के तार सात समंदर पार दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन शातिरों के काम करने का तरीका बेहद सुगठित था। ये कथित तौर पर कुछ बैंककर्मियों की मिलीभगत से बड़े कारपोरेट खातों की गोपनीय जानकारी हासिल करते थे। इसमें खाताधारक का नाम, यूजर आईडी, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और खाते में उपलब्ध कुल रकम का पूरा विवरण शामिल होता था। डेटा मिलने के बाद ये अपराधी मोबाइल पर एक फिशिंग लिंक भेजकर ओटीपी के जरिये नेट बैंकिंग को हैक करते थे। खाते का नियंत्रण हाथ में आते ही ‘स्विफ्ट कोड’ (SWIFT Code) के माध्यम से यह 56 करोड़ की भारी-भरकम राशि सीधे दुबई में बैठे अपने आकाओं के खातों में भेजने की तैयारी थी।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिये भारत लौटता था पैसा

पुलिस जांच के अनुसार, इस गिरोह की डील यह थी कि दुबई में बैठे मास्टरमाइंड हस्तांतरित की गई कुल रकम का 30 प्रतिशत हिस्सा अपने पास कमीशन के तौर पर रखते। वहीं, बची हुई 70 प्रतिशत राशि ‘यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी’ (USDT Crypto) के जरिये भारत में विभिन्न बैंक खातों में वापस मंगाई जाती थी। बाद में इस क्रिप्टोकरेंसी को बेचकर ये अपराधी नकद रकम हासिल कर लेते थे, ताकि जांच एजेंसियों को धन के लेन-देन (मनी ट्रेल) का कोई सीधा सुराग न मिल सके। मोतिहारी साइबर थाने की पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि यह गिरोह 12 अक्टूबर 2026 की रात खाते की पूरी राशि ट्रांसफर करने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। टीम ने पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र में दबिश दी और नौ संदिग्धों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने इनके पास से 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और दो चारपहिया वाहन जब्त किए हैं। जब्त लैपटॉप में कई संदिग्ध पोर्टल और बैंक लॉगिन से जुड़े अहम साक्ष्य मिले हैं। इस संदर्भ में मोतिहारी साइबर थाना कांड संख्या 153/26 दर्ज किया गया है।

ये आरोपित चढ़े पुलिस के हत्थे

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपितों में पकड़ीदयाल के मझार निवासी आनंद किशोर, शिवहर के सुंदरपुर खरौना निवासी अरविन्द कुमार व मनोरंजन कुमार, शिवहर के ही चिकनौटा निवासी रामनाथ ठाकुर शामिल हैं। इसके अलावा पताही के गोनाही निवासी निरंजन यादव उर्फ नीरज, कल्याणपुर के देवापुर निवासी संतोष राम, तुरकौलिया के बिजुलपुर बकसवा निवासी संदीप कुमार, पहाड़पुर के कोटवा बाजपेयी टोला निवासी विजय कुमार और सुगौली के श्रीपुर भरवलिया निवासी पप्पू जायसवाल शामिल हैं। मामले की जानकारी देते हुए साइबर सेल के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुनील कुमार ने बताया कि यह एक बहुत बड़ा नेक्सस है और जांच जारी है। फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस इस बात पर है कि आखिर किस बैंककर्मी ने 56 करोड़ रुपये वाले खाते की इतनी संवेदनशील जानकारी इन अपराधियों तक पहुंचाई। गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक अधिकारियों की संलिप्तता और धन के लेन-देन से जुड़े तमाम पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जल्द ही कुछ और चौंकाने वाली गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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