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बिहार में संविदा पर कार्यरत मेडिकल शिक्षकों का मानदेय बढ़ा, प्रोफेसर को अब ₹2.07 लाख प्रतिमाह।

स्वास्थ्य विभाग का तोहफा: डॉक्टरों की सैलरी में बंपर इजाफा, 1 सितंबर से लागू होंगी नई दरें। पढ़ें पूरी खबर

पटना। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई संजीवनी देने और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के विभिन्न राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों (मेडिकल कॉलेजों) में संविदा के आधार पर अपनी सेवा दे रहे मेडिकल शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में बंपर बढ़ोतरी की है। इस आशय का औपचारिक आदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है, जिससे चिकित्सा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नई संशोधित दरों के तहत अब संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक (प्रोफेसर) को सबसे अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा। अब तक इन्हें प्रतिमाह 1.80 लाख रुपये का मानदेय मिलता था, जिसे एकमुश्त बढ़ाकर 2.07 लाख रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार, चिकित्सा शिक्षा की रीढ़ माने जाने वाले सह-प्राध्यापकों (एसोसिएट प्रोफेसर) के मानदेय को 1.35 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.55 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं, सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) को अब 1.10 लाख रुपये की जगह 1.25 लाख रुपये हर महीने मिलेंगे।

बिहार सरकार ने खोला खजाना

सरकार ने युवा और उभरते डॉक्टरों का भी खास ख्याल रखा है। सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर के लिए अब 1.15 लाख रुपये प्रतिमाह का शानदार मानदेय तय किया गया है। इसके साथ ही, जूनियर रेजिडेंट (जेआर) के मानदेय में भी सीधा 10 हजार रुपये का इजाफा करते हुए इसे 65 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मानदेय की यह नई और आकर्षक दरें 1 सितंबर 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी मानी जाएंगी। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को प्राधिकृत उच्चस्तरीय समिति की गहन अनुशंसा के बाद सक्षम प्राधिकारी से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। विभाग ने सभी संबंधित राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और अस्पताल अधीक्षकों को इस बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए ससमय भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- व्यवस्था को सुदृढ़ करना सर्वोच्च प्राथमिकता

इस फैसले का सीधा असर बिहार की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। अक्सर यह देखा जाता था कि कम मानदेय के कारण योग्य चिकित्सक सरकारी सेवा छोड़कर निजी अस्पतालों का रुख कर लेते थे या अन्य राज्यों में चले जाते थे। सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस आकर्षक पैकेज के बाद राज्य में ही चिकित्सा प्रतिभाओं को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े पदों पर विशेषज्ञ और योग्य चिकित्सक आकर्षित होंगे। अंततः इसका सीधा लाभ राज्य के सुदूर इलाकों से इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में आने वाले गरीब और आम मरीजों को मिलेगा। इस बड़े फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने कहा कि बिहार सरकार राज्य की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं विश्वस्तरीय बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण फैसले ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापकों, सह-प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों, सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की मरीजों के इलाज और नए डॉक्टरों को गढ़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके इस निस्वार्थ योगदान और समर्पण को देखते हुए ही सरकार ने उनके मानदेय में इस सम्मानजनक वृद्धि का निर्णय लिया है। मंत्री ने भरोसा जताया कि इस ऐतिहासिक फैसले से चिकित्सकीय शिक्षकों और युवा रेजिडेंट डॉक्टरों को नया प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य में विशेषज्ञ मानव संसाधन की उपलब्धता और अधिक मजबूत होगी।

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