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बड़ी मछलियां आजाद, छोटे अफसरों पर गाज! रिशु श्री घोटाले का वो सच जो सरकार छुपाना चाहती है?

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने प्रदेश की सम्राट सरकार के खिलाफ चौतरफा हमला बोलते हुए राज्य में भारी भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने का गंभीर आरोप लगाया है। पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सांसद ने रिशु श्री मामले में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को महज एक ‘आई वॉश’ (दिखावा) करार दिया। उन्होंने दावा किया कि शासन और प्रशासन में बैठे बड़े मगरमच्छों को बचाने के लिए छोटी मछलियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।सांसद सुधाकर सिंह ने रिशु श्री मामले का ब्यौरा देते हुए कहा कि योगेंद्र सागर और अभिलाषा शर्मा जैसे छोटे अधिकारियों को निलंबित करना केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। चंद लाख रुपयों के आरोप में इन पर मामूली कार्रवाई हुई है, लेकिन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई।सांसद ने सनसनीखेज दावा किया कि रिशु श्री और वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट में विदेश यात्राओं और महंगे तोहफों के लेन-देन का साफ जिक्र है। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि ₹1,180 करोड़ के पहले टेंडर का पहला कमीशन यानी ₹72 करोड़ सीधे रिशु श्री के खाते में ट्रांसफर हुआ था। आनंद किशोर, धर्मेंद्र कुमार और संतोष मल्ल सहित 9 बड़े अधिकारियों पर पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद न तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) कोई कार्रवाई कर रही है और न ही राज्य सरकार। इसके विपरीत, आनंद किशोर पर गंभीर आरोप होने के बाद भी उन्हें वित्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाजा गया है।

भ्रष्टाचार के खेल को उजागर करते हुए सांसद ने कहा कि राज्य के नगर विकास और ‘नमामि गंगे’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में सबसे अधिक सरकारी धन की लूट हुई है। गंगा सफाई के नाम पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये का महाघोटाला किया गया है, जिसमें काम करने वाली तमाम ठेकेदार कंपनियां गुजरात की थीं। उन्होंने आगे कहा कि तारिणी प्रसाद जैसे लोगों के घर से 11 करोड़ की नकदी बरामद होना इस बात का सबूत है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। इसी अवैध उगाही के पैसों से मुख्यमंत्री सचिवालय के जरिए राज्य में मनचाही पोस्टिंग का खेल खेला जाता है।भ्रष्टाचार के अलावा, राजद सांसद ने आरा के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर भी विस्फोटक बयान दिया। उन्होंने इसे पूरी तरह एक ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार देते हुए कहा कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए विशेष रूप से पटना से एसटीएफ (STF) की टीम भेजी गई थी।

सांसद ने सीधे तौर पर सीनियर पुलिस अधिकारी एडीजी कुंदन कृष्णन का नाम लेते हुए कहा कि उन्हीं के इशारे पर इस फर्जी मुठभेड़ को अंजाम दिया गया है ताकि कुछ सफेदपोशों के राज हमेशा के लिए दफन रहें।सुधाकर सिंह ने खुद की जान को खतरा बताते हुए एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि जब वे पिछले साल से दीपक कुमार के खिलाफ लगातार पोल खोल रहे थे, तब एडीजी कुंदन कृष्णन ने उन्हें खुद फोन कर जान से मारने की धमकी दी थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वे अपने 25 साल के राजनीतिक करियर में पहली बार मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे और इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री से भी मुलाकात कर अपनी सुरक्षा और इस पूरे मामले से उन्हें अवगत कराया था। सांसद ने मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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