
बिहार में घर खरीदारों की शिकायतों पर अब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने कार्रवाई तेज कर दी है। रेरा के आदेश के बावजूद खरीदारों की बकाया राशि नहीं लौटाने वाले बिल्डरों और प्रोमोटरों के खिलाफ विशेष वसूली अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सर्टिफिकेट वादों के माध्यम से बकाया रकम की वसूली की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
रेरा बिहार की इस कार्रवाई का असर भी दिखाई देने लगा है। बीते एक महीने में कई मामलों में घर खरीदारों को उनकी बकाया रकम का भुगतान कराया गया है। इसके साथ ही रेरा कानून का उल्लंघन करने वाले प्रोमोटरों पर लगाए गए जुर्माने की राशि भी वसूल की गई है।
आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, पुलिस ने प्रोमोटर को पकड़ा
18 अगस्त को सर्टिफिकेट वाद संख्या 4924/2025-26 में बड़ी कार्रवाई हुई। इजिओन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े इस मामले में प्रोमोटर ने शिकायतकर्ता मो. काशिफ यूनुस को कुल 13 लाख रुपये का भुगतान किया।
मामले में वर्ष 2022 में रेरा ने शिकायतकर्ता के पक्ष में 67.64 लाख रुपये के भुगतान का आदेश दिया था। इसके बावजूद बिल्डर ने रकम नहीं चुकाई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने निष्पादन वाद दायर किया। बाद में बकाया राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट वाद की प्रक्रिया शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान प्रोमोटर लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया। 18 अगस्त को पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सर्टिफिकेट पदाधिकारी अनिमेष पांडेय की अदालत में पेश किया।
अदालत में प्रोमोटर ने शिकायतकर्ता को 5.80 लाख रुपये नकद दिए और 7.20 लाख रुपये का चेक सौंपा, जिसे बाद में भुना लिया गया। शेष रकम चुकाने के लिए छह किश्तों के छह पोस्ट-डेटेड चेक भी दिए गए।
दूसरे खरीदारों को भी मिली आंशिक राहत
सर्वोदय मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सर्टिफिकेट वाद संख्या 4934/2025-26 में शिकायतकर्ता पवन कुमार अग्रवाल को 29.51 लाख रुपये की बकाया राशि के मुकाबले 7 लाख रुपये का चेक दिया गया। मामले में आगे की वसूली प्रक्रिया जारी है।
इसी कंपनी से जुड़े एक अन्य मामले, सर्टिफिकेट वाद संख्या 2120/2024-25 में पीयूष श्रीवास्तव को भी 7 लाख रुपये का चेक मिला। इससे पहले प्रोमोटर 27.50 लाख रुपये वापस कर चुका था, जबकि 11 लाख रुपये का भुगतान अभी बाकी है।
नियम तोड़ने वाले बिल्डरों से जुर्माना भी वसूल
रेरा की कार्रवाई केवल घर खरीदारों की रकम वापस कराने तक सीमित नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोमोटरों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली भी सर्टिफिकेट वादों के जरिए की जा रही है।
टेक्नोकल्चर बिल्डिंग सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की ‘वास्तु विहार, मोतिहारी-चरण III’ परियोजना में रेरा अधिनियम के उल्लंघन के मामले में कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। भुगतान नहीं होने पर सर्टिफिकेट वाद दायर किया गया और अब राशि वसूल कर ली गई।
इसी तरह अबू कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड पर लगाए गए 10 लाख रुपये के जुर्माने की भी वसूली की गई। दोनों मामलों में कार्रवाई सर्टिफिकेट पदाधिकारी अमरेन्द्र शाही की अदालत में हुई।
रेरा परिसर में ही होगी बकाया राशि की वसूली
घर खरीदारों को राहत देने के लिए रेरा बिहार ने वसूली की व्यवस्था को भी मजबूत किया है। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को सर्टिफिकेट पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है और उनकी अदालतें रेरा परिसर में ही संचालित हो रही हैं।
रेरा में सचिव के पद पर कार्यरत अनिमेष पांडेय और वरीय भूमि राजस्व पदाधिकारी अमरेन्द्र शाही को भी सर्टिफिकेट पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस व्यवस्था से खरीदारों को रेरा के आदेश के बाद रकम की वसूली के लिए अलग-अलग कार्यालयों या मंचों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। यदि कोई प्रोमोटर आदेश का पालन नहीं करता है, तो रेरा के स्तर पर ही सर्टिफिकेट वाद के जरिए बकाया राशि की वसूली आगे बढ़ाई जा सकेगी।
रेरा बिहार की बढ़ती सख्ती से उन बिल्डरों पर दबाव बढ़ने की संभावना है, जो आदेश के बावजूद घर खरीदारों का पैसा लौटाने में देरी कर रहे थे। वहीं, खरीदारों के लिए यह कदम रेरा के आदेशों को प्रभावी तरीके से लागू कराने और बकाया रकम वापस दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



