
पटना। राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों में लंबे समय बाद शुरू होने जा रही सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की बहाली प्रक्रिया को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने प्रस्तावित ‘सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026’ पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि इसका सीधा प्रभाव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, शोध कार्यों, मेधावी छात्रों और वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर पड़ेगा।चिराग पासवान ने नियमावली में संशोधन के लिए छह प्रमुख बिंदु उठाए हैं, जिनमें यूजीसी रेगुलेशन 2018 (Table 3A) के मानकों को पूर्णतः लागू करना, बहाली में लंबे अंतराल के कारण अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष तय करना, स्थानीय अभ्यर्थियों के अधिकारों के संरक्षण हेतु डोमिसाइल नीति अनिवार्य करना, वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के अनुभव के आधार पर उनका सेवा-समायोजन या उचित अवसर सुनिश्चित करना, तदर्थ व्यवस्था समाप्त कर केवल स्थायी व नियमित भर्ती करना और विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व शैक्षणिक स्वायत्तता को बनाए रखना शामिल है। उन्होंने आग्रह किया कि नियमावली को अंतिम रूप देने से पूर्व छात्र संगठनों, अतिथि शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए ताकि योग्य अभ्यर्थियों के साथ पूर्ण न्याय हो सके।



