
सुपौल। बिहार के सुपौल जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ राघोपुर थाना क्षेत्र के सिमराही वार्ड नंबर-04 में आज सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला अपने 9 वर्षीय मासूम बेटे के साथ गगनचुंबी मोबाइल टावर पर चढ़ गई। महिला की जिद थी कि जब तक जिले के आला अधिकारी (DM और SP) मौके पर नहीं आते, वह नीचे नहीं उतरेगी। इस घटना के बाद इलाके में करीब 4 घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।टावर पर चढ़ी महिला की पहचान गुड्डी देवी के रूप में हुई है। पीड़िता ने अपने पति अमरेंद्र ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि करीब 10 वर्ष पूर्व उसने मोतीपुर निवासी अमरेंद्र ठाकुर से दिल्ली में प्रेम विवाह (Love Marriage) किया था। शादी के बाद दोनों का एक 9 साल का बेटा भी है। पीड़िता का आरोप है कि कुछ समय तक सब ठीक रहने के बाद, उसके पति अमरेंद्र ठाकुर ने उसे धोखा दे दिया और उसकी जानकारी के बिना गुपचुप तरीके से दूसरी शादी रचा ली। जब उसने इसका विरोध किया, तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा।
मोबाइल टावर से चिल्लाते हुए महिला ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। महिला का कहना है कि पति की दूसरी शादी और अपने हक के लिए वह पिछले कई महीनों से लगातार राघोपुर थाने और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रही है। हर बार उसे सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन आरोपी पति के खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।सिस्टम की इसी बेरुखी और न्याय न मिलने से तंग आकर आखिरकार उसने यह आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया और अपने मासूम बच्चे की जान जोखिम में डालकर टावर पर चढ़ गई।सुबह-सुबह मां-बेटे को टावर पर चढ़ा देख स्थानीय लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। आनन-फानन में इसकी सूचना राघोपुर थाना पुलिस को दी गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लाउडस्पीकर के जरिए महिला को समझाने-बुझाने की कोशिश शुरू की।

शुरुआत में महिला सिर्फ DM और SP को बुलाने की मांग पर अड़ी रही, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि, करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और पुलिस द्वारा आरोपी पति के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिखित/ठोस आश्वासन के बाद महिला आखिरकार अपने बेटे के साथ सुरक्षित नीचे उतरने को तैयार हुई।महिला के नीचे उतरने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षा का भरोसा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना इस बात का सबूत है कि जब जमीनी स्तर पर थानों में पीड़ितों की सुनवाई नहीं होती, तो मजबूर होकर उन्हें ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं।



