newspatnarajnitiबिहारराजनीति

पटना एमएलसी चुनाव: दांव पर नीतीश की साख, बगावत और समीकरणों के बीच निशांत के नेतृत्व की अग्निपरीक्षा

पटना। बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट का चुनाव इस बार महज हार-जीत का सामान्य मुकाबला नहीं रह गया है। यह चुनाव सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के लिए एक सियासी ‘लिटमस टेस्ट’ बन चुका है। उम्मीदवार भले ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार हैं, लेकिन दांव पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक साख और उनके पुत्र निशांत कुमार का राजनीतिक भविष्य लगा है। इसके साथ ही मोकामा विधायक अनंत सिंह की खुली बगावत ने इस लड़ाई को जदयू के आंतरिक शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बना दिया है।

निशांत कुमार के लिए पहला ‘लॉन्चपैड’

सियासी हलकों में लंबे समय से चर्चा है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी की विरासत संभालने के लिए निशांत कुमार को तैयार किया जा रहा है। पटना स्नातक क्षेत्र का यह चुनाव निशांत के लिए पहला बड़ा ‘लॉन्चपैड’ साबित हो रहा है। निशांत न सिर्फ नीरज कुमार के नामांकन में शामिल हुए, बल्कि उन्होंने चुनाव प्रबंधन की पूरी कमान अपने हाथों में ले ली है। पटना, नालंदा और नवादा के सभी 26 विधानसभा क्षेत्रों में जदयू के जमीनी कार्यकर्ताओं को सीधे टास्क दिए गए हैं। अगर नीरज कुमार बड़े अंतर से जीतते हैं, तो इसे पार्टी के भीतर निशांत की रणनीतिक क्षमता और नेतृत्व की स्वीकार्यता की पहली बड़ी जीत माना जाएगा। इस चुनाव को सबसे ज्यादा दिलचस्प अनंत सिंह के स्टैंड ने बना दिया है। अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जनसुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह को अपना समर्थन दे दिया है। चूंकि दोनों उम्मीदवार भूमिहार समुदाय से आते हैं, इसलिए सवर्ण वोटों में बिखराव का खतरा मंडरा रहा है। जदयू नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने ही विधायक के बाहुबल और प्रभाव की काट तलाशते हुए पार्टी के संगठनात्मक अनुशासन को कायम रखने की है। जातीय समीकरणों के लिहाज से पटना, नालंदा और नवादा का यह इलाका नीतीश कुमार का मजबूत गढ़ रहा है। इसे देखते हुए मुख्य विपक्षी दल राजद ने कुर्मी समुदाय से आने वाले दिलीप पटेल को मैदान में उतारकर जदयू के ‘लव-कुश’ वोट बैंक में सीधी सेंधमारी की कोशिश की है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जदयू ने एक विशेष रणनीति तैयार की है। निशांत कुमार के निर्देश पर स्थानीय कुर्मी और कुशवाहा नेताओं की विशेष टीमें बनाई गई हैं। जदयू का संदेश साफ है कि यह चुनाव किसी एक जाति का नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के राजनीतिक आधार को सुरक्षित रखने की लड़ाई है।

भविष्य की राजनीति तय करेंगे नतीजे

कुल मिलाकर, पटना स्नातक सीट का परिणाम बिहार की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। नतीजे यह बताएंगे कि नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक उनके बेटे के नेतृत्व पर कितना भरोसा जताता है और क्या जदयू का संगठन बगावती सुरों को खामोश कर नीरज कुमार को जीत दिला पाएगा।

Related Articles

Back to top button