
पटना। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के उस विवादित बयान पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है, जिसमें उन्होंने युवाओं के लिए ‘तेलचट्टा’ जैसे शब्द का प्रयोग किया था। रविवार को राजधानी पटना के हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने तल्ख तेवर अपनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए देश के भविष्य यानी युवाओं के खिलाफ इस तरह की हल्की और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना कतई जायज नहीं है। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि युवा इस देश की मजबूत रीढ़ हैं और उनका सार्वजनिक अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
छात्र आंदोलनों से मिलती है देश को नई दिशा
हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर युवाओं व छात्रों द्वारा किए जा रहे आंदोलनों पर अपनी बेबाक राय रखते हुए लोजपा (आर) प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। चिराग ने कहा कि अगर छात्र सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं, तो यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इतिहास गवाह है कि युवा और छात्र आंदोलनों ने हमेशा देश और समाज को नई दिशा दिखाने का काम किया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि कोई भी आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होना चाहिए। आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए जो संयमित कदम उठाए, वह पूरी तरह से उचित थे।
हर बात पर इस्तीफे की मांग करना विपक्ष की आदत
चुनाव आयोग से जुड़ी व्यवस्थाओं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे दबाव पर भी चिराग पासवान ने जमकर चुटकी ली। विपक्षी दलों को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को हर बात पर इस्तीफा मांगने की आदत हो गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर चीज का हल केवल इस्तीफा देने से ही निकल जाता, तो चिराग पासवान ने कब का इस्तीफा दे दिया होता। लोजपा (आर) अध्यक्ष ने विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि यदि उन्हें चुनाव आयोग या संवैधानिक व्यवस्थाओं से इतनी ही परेशानी है, तो विपक्ष शासित राज्यों की सरकारों को सबसे पहले अपना इस्तीफा सौंप देना चाहिए। बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने आगे कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया पर ही भरोसा नहीं है, तो लोकसभा में बैठे सभी विपक्षी सांसदों को तुरंत इस्तीफा देकर दोबारा चुनावी मैदान में आना चाहिए। युवाओं के वोट चोरी होने के आरोपों और उस पर हो रही बयानबाजी को लेकर चिराग ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए युवाओं को भड़का रहे हैं। वे अराजकता का समर्थन कर देश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन्हीं युवाओं ने हमेशा देश की दशा बदली है। अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। चिराग ने खुद को सरकार के भीतर एक ‘चौकीदार’ बताते हुए कहा कि वह आंख मूंदकर सब कुछ स्वीकार नहीं करते, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्होंने खुद सरकार के सामने मुखर होकर कई विषयों पर सवाल खड़े किए हैं।



