
पटना। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। हालांकि, इस शिष्टाचार और बधाई संदेश के आवरण में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बिहार की राज्य सरकार पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया है। सहनी ने सूबे में आई विनाशकारी बाढ़ और उससे उपजे विस्थापन का अहम मुद्दा उठाते हुए सत्ताधारी दल की प्राथमिकताओं और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।मंगलवार को मीडिया को जारी अपने विस्तृत बयान में वीआईपी सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस सुदीर्घ राजनीतिक सफर में प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत राजनीतिक आकांक्षाएं तो पूरी तरह से फलीभूत हो चुकी हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि देश के आम नागरिकों के बहुप्रतीक्षित ‘अच्छे दिन’ आने की वास्तविक उम्मीद भी धरातल पर पूरी होनी चाहिए। सहनी का यह बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार के पुराने वादों और वर्तमान जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करता है।
बाढ़ से बेघर हुए लोग आखिर कहां जलाएंगे दीप
प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और विशेषकर ‘दीप जलाने’ की अपील पर सहनी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सूबे की विकट स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में बिहार के कई हिस्से भयानक बाढ़ के पानी में पूरी तरह से डूबे हुए हैं। नदियां उफान पर हैं, जिसके कारण लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर तटबंधों, सड़कों और राहत शिविरों में तिरपाल के नीचे शरण लेने को विवश हैं। वीआईपी प्रमुख ने सीधा सवाल दागते हुए पूछा कि ऐसी त्रासदी की स्थिति में जिन गरीब परिवारों के सिर से छत ही छिन गई है, वे आखिर कहां और कैसे दीप जलाएंगे?राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए मुकेश सहनी ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने एक ऐतिहासिक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का मौजूदा रवैया बिल्कुल वैसा ही है, जैसे ‘जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था।’ उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरा बिहार गंभीर बाढ़ और विस्थापन की त्रासद मार झेल रहा है, तब सत्ताधारी दल उत्सव मनाने में मग्न है। यह स्थिति सरकार की घोर संवेदनहीनता को दर्शाती है।
बाढ़, बेबसी और जन्मदिन का जश्न
अपने बयान के अंत में वीआईपी नेता ने स्पष्ट मांग की है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर होने वाले जश्न के शोर में बिहार के गरीब, बाढ़-पीड़ित और बेघर परिवारों की दुर्दशा को कतई नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को नसीहत दी कि उत्सव से कहीं अधिक तवज्जो बाढ़ प्रभावितों के त्वरित बचाव, पुनर्वास और उन्हें पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराने को दी जानी चाहिए। सहनी ने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में सरकार की उपलब्धियों की चर्चा के साथ-साथ जनता की बुनियादी परेशानियों पर मुखर होना विपक्ष का परम दायित्व है। उन्होंने पीएम को पुनः शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि जल्द ही देशवासियों की सामाजिक-आर्थिक आकांक्षाएं पूरी हों और बिहार के बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित छत नसीब हो।



