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मोतिहारी में प्रशासन का बड़ा एक्शन: 26 अंचलों के सीओ और राजस्व अधिकारियों का वेतन बंद, महकमे में मची खलबली

26 अंचलों के सीओ और राजस्व अधिकारियों का वेतन बंद, महकमे में मची खलबली

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले में सरकारी कामकाज में लापरवाही और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन ने कड़ा चाबुक चलाया है। जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर जिले के 26 अंचलों के अंचलाधिकारियों (CO) और सभी राजस्व पदाधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक के लिए तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से पूरे राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी कार्य में शिथिलता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई में केवल बंजरिया अंचल के अधिकारियों को मुक्त रखा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर समाहर्त्ता (पूर्वी चंपारण) द्वारा हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीडब्ल्यूजेसी (CWJC) और एमजेसी (MJC) जैसे महत्वपूर्ण मामलों की अद्यतन स्थिति का जायजा लेना था। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि बार-बार सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद, बंजरिया अंचल को छोड़कर जिले के किसी भी अन्य अंचलाधिकारी ने अपनी संबंधित रिपोर्ट (प्रतिवेदन) विभाग को नहीं सौंपी है। प्रशासन ने इसे कार्य के प्रति घोर लापरवाही और निर्देशों की खुली अवहेलना माना है।

समीक्षा बैठक में खुली लापरवाही की पोल

केवल अदालती और लंबित मामलों में ही नहीं, बल्कि ‘राजस्व महाअभियान’ में भी इन अधिकारियों का रवैया बेहद निराशाजनक पाया गया। अभियान की प्रगति की समीक्षा में यह बात स्पष्ट रूप से उभर कर आई कि अंचलाधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण कार्य में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। जिला प्रशासन ने अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये को कार्य के प्रति उदासीनता, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का द्योतक माना। इसी लापरवाही को मुख्य आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने 26 अंचलों के अधिकारियों का वेतन रोकने का कड़ा कदम उठाया है। वेतन स्थगित करने के साथ-साथ जिला प्रशासन ने सभी डिफॉल्टर अधिकारियों को 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सभी संबंधित सीओ और राजस्व पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सीडब्ल्यूजेसी, एमजेसी और राजस्व महाअभियान से जुड़े अपने सभी लंबित प्रतिवेदन तत्काल प्रभाव से विभागीय पोर्टल पर अपलोड करें। इसमें किसी भी तरह की देरी क्षम्य नहीं होगी।

24 घंटे का अल्टीमेटम, देनी होगी ऑनलाइन रिपोर्ट

पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करने के अलावा, इन सभी अधिकारियों को अपर समाहर्त्ता (मोतिहारी) के माध्यम से 24 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत करना होगा। अधिकारियों को अपने जवाब में यह स्पष्ट करना होगा कि सरकारी कार्यों में अपेक्षित रुचि न लेने के कारण उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र क्यों न लिखा जाए। अब अधिकारियों के जवाब के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, इस आदेश के जारी होते ही अंचल कार्यालयों में लंबित फाइलों को निपटाने की होड़ मच गई है।

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