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मुंगेर में बेकाबू हुई गंगा : घर-बार छोड़कर सड़क पर आए ग्रामीण, जिंदगी बचाने की जद्दोजहद।

गंगा उफान पर, सिस्टम फेल! मुंगेर के बरियारपुर में बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे बाढ़ पीड़ित।

मुंगेर। जिले में गंगा के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि अब विकराल रूप धारण करने लगी है। गंगा के उफान से निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। बरियारपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाली करहरिया पूर्वी पंचायत के कई वार्ड पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि बाढ़ का पानी लोगों के घरों के भीतर तक प्रवेश कर गया है। इसके चलते सैकड़ों ग्रामीणों को अपना घर-बार छोड़कर बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटकना पड़ रहा है। वर्तमान में ये बाढ़ पीड़ित ग्रामीण सड़कों के किनारे तिरपाल और अस्थायी झोपड़ियां बनाकर शरण लेने को विवश हैं। आसमान से बरसते पानी और नीचे उफनती गंगा ने ग्रामीणों के लिए दोहरी मुसीबत खड़ी कर दी है। कई परिवार अपना जरूरी घरेलू सामान लेकर जैसे-तैसे सड़क किनारे पहुंच तो गए हैं, लेकिन बारिश के बीच रात गुजारना उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। सड़क किनारे डेरा डाले ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक पर्याप्त पॉलिथीन (तिरपाल) भी मुहैया नहीं कराई गई है। इसके अलावा शुद्ध पेयजल और अस्थायी शौचालयों की कोई व्यवस्था न होने से लोगों, विशेषकर महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मवेशियों के लिए भी चारे और सुरक्षित स्थान का संकट गहरा गया है।

बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, सुविधाओं का घोर अभाव

बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में लोगों का मुख्य सहारा नावें होती हैं, लेकिन करहरिया पूर्वी पंचायत में इनकी भारी कमी है। ग्रामीणों के अनुसार, मुरला मुसहरी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा महज एक नाव उपलब्ध कराई गई है, जो इतनी बड़ी आबादी के लिए नाकाफी है। पंचायत के अन्य प्रभावित वार्डों के लिए अब तक पर्याप्त नावों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में रोजमर्रा की जरूरतों और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से राहत शिविर शुरू करने की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि प्रभावित परिवारों को अविलंब पर्याप्त नावें, पॉलिथीन, पीने का स्वच्छ पानी और शौचालय उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही, जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य शिविर लगाने की भी पुरजोर मांग की गई है, ताकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को समय पर दवाइयां मिल सकें।

राहत शिविर और स्वास्थ्य सुविधाओं की उठी मांग

करहरिया पूर्वी पंचायत के मुखिया नंदलाल मंडल ने बताया कि पंचायत के बाढ़ प्रभावित वार्डों और बेघर हुए परिवारों की विस्तृत जानकारी बरियारपुर के अंचलाधिकारी (सीओ) को सौंप दी गई है। मुखिया के अनुसार, अंचलाधिकारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही राहत शिविर चालू करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग की टीम से भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर मेडिकल कैंप लगाने का आग्रह किया गया है। वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने की कवायद जारी है।

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