
पटना। बिहार में एक बार फिर नदियां उफान पर हैं और सूबे के कई जिले बाढ़ की भीषण विभीषिका झेल रहे हैं। पटना, बक्सर और भागलपुर सहित कई इलाकों में बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। संकट की इस घड़ी में सरकारी तंत्र के साथ-साथ समाज के प्रबुद्ध और सक्षम लोग भी पीड़ितों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में चर्चित शिक्षण संस्थान ‘ज्ञान बिंदु इंस्टीट्यूट’ के निदेशक रौशन आनंद ने भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित मदरौनी क्षेत्र का दौरा किया और बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर आवश्यक राहत सामग्री का वितरण किया।मंगलवार को मदरौनी के सुदूर और जलमग्न इलाकों में पहुंचकर रौशन आनंद ने पीड़ितों का दर्द साझा किया। राहत सामग्री बांटने के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा के समय समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना हम सभी का परम और नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि केवल प्रशासन के भरोसे बैठने के बजाय समाज के हर उस व्यक्ति को आगे आना चाहिए, जो मदद करने में सक्षम है।
अस्थायी नहीं, चिरस्थायी समाधान तलाशे सरकार
राहत वितरण के दौरान रौशन आनंद ने सम्राट सरकार से बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ का आना और फिर कुछ दिनों के लिए चूड़ा-गुड़ या राहत पैकेट बांट देना इस गंभीर समस्या का स्थायी इलाज नहीं है। वर्ष 2026 की इस प्रलयंकारी बाढ़ ने पटना से लेकर बक्सर तक भारी तबाही मचाई है। विशेषकर भागलपुर जिला इस बार सर्वाधिक प्रभावित है, जिसे देखते हुए यहां सरकार को विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नदियों के किनारे मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले बांधों का निर्माण कराया जाए तथा कटाव रोकने के लिए एक ठोस एवं दीर्घकालिक योजना धरातल पर उतारी जाए। एक ओर जहां रौशन आनंद ने स्थायी समाधान की मांग उठाई, वहीं दूसरी ओर उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री की कार्यशैली और सक्रियता की जमकर तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि सूबे के मुखिया द्वारा रात के तीन बजे तक बाढ़ ग्रस्त इलाकों में खुद घूम-घूमकर हालात का जायजा लेना कोई छोटी बात नहीं है। मुख्यमंत्री की यह संवेदनशीलता सराहनीय है और यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद के लिए मुस्तैद है।
सक्षम लोगों से आगे आने का किया आह्वान
अपने दौरे के अंत में रौशन आनंद ने कहा कि आज बिहार के लोग हर क्षेत्र में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बना रहे हैं। उन्होंने मदरौनी में चलाए गए इस राहत अभियान के माध्यम से समाज के सभी साधन संपन्न लोगों से मार्मिक अपील की कि वे इस मुश्किल वक्त में अपने-अपने घरों से बाहर निकलें और बाढ़ पीड़ितों की खुले मन से सहायता करें। एकजुटता और सामाजिक सहभागिता से ही इस बड़ी आपदा का डटकर मुकाबला किया जा सकता है।



