
पटना। भारतीय राजनीति में शुचिता, अडिग संघर्ष और संपूर्ण क्रांति के पर्याय, लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की 124वीं जयंती रविवार को पूरे राज्य में असीम श्रद्धा, उल्लास और सम्मान के साथ मनाई गई। राजधानी पटना के ऐतिहासिक जेपी गोलंबर स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा के समक्ष एक भव्य राजकीय समारोह का आयोजन किया गया। यहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम नेताओं ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस महान स्वतंत्रता सेनानी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।समारोह की विधिवत शुरुआत सुबह पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुई। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और वरिष्ठ मंत्री रामकृपाल यादव सहित शासन-प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारियों ने जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल ‘जयप्रकाश नारायण अमर रहें’ और ‘संपूर्ण क्रांति का नारा है, भावी इतिहास हमारा है’ जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। आयोजन में शामिल नेताओं ने लोकनायक के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके द्वारा दिखाए गए सत्य, अहिंसा और मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों के मार्ग पर आजीवन चलने का संकल्प दोहराया।
पटना में गूंजा जेपी का जयघोष
इस भावपूर्ण मौके पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जेपी के अमूल्य योगदान को विस्तार से याद किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश और विशेषकर बिहार के सर्वांगीण उत्थान के लिए जयप्रकाश नारायण द्वारा किए गए निस्वार्थ कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि यह जेपी का ही अदम्य साहस और करिश्माई नेतृत्व था, जिसने 1974 में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व छात्र आंदोलन की मजबूत नींव रखी थी। उस विराट आंदोलन की गूंज ने स्वतंत्र भारत की राजनीति की दशा और दिशा को पूरी तरह से बदलकर रख दिया था।गौरतलब है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण भारतीय राजनीति के उन गिने-चुने शिखर पुरुषों में शुमार हैं, जिन्होंने कभी भी सत्ता का मोह नहीं किया। उन्होंने हमेशा लोकतंत्र की रक्षा, भ्रष्टाचार के कड़े विरोध और व्यापक सामाजिक बदलाव के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। 1970 के दशक में जब देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर भारी संकट के बादल मंडरा रहे थे, तब जेपी ने आगे आकर आम जनता का सफल मार्गदर्शन किया। उनके कुशल नेतृत्व में चला वह जनआंदोलन देश की राजनीति को एक नई दिशा देने में पूर्णतः सफल रहा। बिहार इस ऐतिहासिक महासंग्राम और सत्ता परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा था। यही कारण है कि पटना की धरती पर उनकी जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम का एक विशेष और बहुत गहरा ऐतिहासिक महत्व है।
सीएम ने कहा- ’74 के आंदोलन ने बदली देश की दिशा’
आज बिहार की समकालीन राजनीति में जो भी प्रमुख चेहरे दिखाई देते हैं, उनमें से अधिकांश जेपी के उसी विराट छात्र आंदोलन की ही देन हैं। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, जनता दल यूनाइटेड के शीर्ष नेता नीतीश कुमार, जननायक स्वर्गीय रामविलास पासवान और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी जैसे तमाम दिग्गज राजनेताओं ने जेपी की उंगली पकड़कर ही सक्रिय राजनीति का ककहरा सीखा था। इन सभी नेताओं ने अपने कड़े संघर्ष से बिहार के साथ-साथ केंद्र की राजनीति में भी अपनी अहम और निर्णायक भूमिका निभाई है। आज भले ही लोकनायक भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनका बेदाग जीवन दर्शन, उनके उच्च आदर्श और उनका महान त्याग आज भी भारतीय समाज के लिए एक सच्चे प्रकाश स्तंभ की तरह ही काम कर रहा है।



