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राष्ट्रीय लोक अदालत में उमड़ी वादकारियों की भारी भीड़, चालान निपटारे को लेकर लगी लंबी कतारें

आपसी सुलह से सिविल, दुर्घटना दावा व बैंक ऋण मामलों का मौके पर हुआ निस्तारण

मोतिहारी। न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय पाने और वर्षों पुराने वादों को सुलझाने के लिए वादकारियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह से ही अदालत परिसर में लोगों की चहल-पहल शुरू हो गई, जो देर शाम तक बदस्तूर जारी रही। इस विशेष लोक अदालत का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी सौरभ सुमन यादव, न्यायिक पदाधिकारियों एवं जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। लोक अदालत में इस बार सबसे अधिक गहमागहमी और भीड़ मोटर वाहन चालान के निपटारे को लेकर बने काउंटरों पर देखी गई। परिवहन विभाग एवं यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े पुराने मुकदमों में सरकार द्वारा दी गई विशेष राहत का लाभ उठाने के लिए वाहन मालिकों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। निर्धारित नियमों के तहत आधा जुर्माना जमा कर तत्काल ‘नो-ड्यूज प्रमाणपत्र’ (अदेय प्रमाण पत्र) दिए जाने की व्यवस्था ने वाहन स्वामियों को बड़ी राहत दी। लोगों ने इस सुनहरे मौके का लाभ उठाते हुए बरसों से लंबित ई-चालान और जुर्माने की राशि जमा कर अपने कागजात दुरुस्त कराए।

आधा जुर्माना जमा कर वाहन चालान से मुक्ति पाने की होड़

लोक अदालत की विभिन्न पीठों (बेंचों) में सिविल वाद, मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), बैंक ऋण वसूली, चेक बाउंस, माप-तौल विभाग तथा पारिवारिक सुलह से जुड़े मामलों की विस्तृत सुनवाई की गई। न्यायिक पदाधिकारियों और सुलहकर्ताओं की मध्यस्थता से दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर सौहार्दपूर्ण माहौल में विवादों का स्थायी समाधान कराया गया। कई वर्षों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे पक्षकारों के चेहरे पर फैसला होने के बाद संतोष और मुस्कान साफ दिखाई दी। बैंक ऋण के मामलों में भी एकमुश्त निपटान योजना के तहत कर्जदारों को विशेष छूट देकर फाइलें बंद की गईं।

समय, धन और मानसिक तनाव से मुक्ति का सशक्त माध्यम

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक अत्यंत मानवीय और व्यावहारिक अंग है। इसका मुख्य उद्देश्य जटिल अदालती प्रक्रियाओं से इतर दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से अधिकतम लंबित मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इससे न केवल मुकदमों का बोझ कम होता है, बल्कि वादकारियों के बहुमूल्य समय और धन की भी बड़ी बचत होती है।

वहीं, अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि राजीव कुमार द्विवेदी ने कहा कि लोक अदालत आम जनता, विशेषकर कमजोर वर्गों को सुलभ, निष्पक्ष और त्वरित न्याय दिलाने का सबसे प्रभावी मंच है। इसमें दोनों पक्षों की जीत होती है और सामाजिक समरसता बनी रहती है।

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