
पटना। सरकारी पद सिर्फ अधिकार और सुख-सुविधाएं भोगने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जनता की सेवा और राज्य के विकास में अपना शत-प्रतिशत योगदान देने का एक ऐतिहासिक अवसर है। बिहार में 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा के जरिए चयनित 2000 नवनियुक्त अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री ने यह दो टूक बात कही। उन्होंने अफसरों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही का अहसास कराते हुए पूरी ईमानदारी, निर्भीकता और बिना किसी दबाव के काम करने का कड़ा निर्देश दिया।नवनियुक्त अधिकारियों की हौसलाअफजाई करते हुए सीएम ने कहा कि आपके कंधों पर अब एक बड़े राज्य की जिम्मेदारी है। आप कुर्सी पर बैठकर जिस भी फाइल पर साइन करेंगे, उसका सीधा असर जमीनी स्तर पर किसी न किसी परिवार के जीवन पर पड़ेगा। इस नौकरी से आपके निजी जीवन में तो बदलाव आएगा ही, लेकिन असली कामयाबी तब है जब आपके एक सही फैसले से समाज में सकारात्मक बदलाव आए, किसी जरूरतमंद को राहत मिले और किसी गांव की तस्वीर बदल जाए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार की तरक्की सीधे तौर पर सूबे की प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली से जुड़ी है। अधिकारी जितने ईमानदार, जिम्मेदार और पारदर्शी होकर काम करेंगे, प्रदेश उतनी ही तेजी से विकास की राह पर दौड़ेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकारी सेवा में आने के बाद जनता का भरोसा जीतना सबसे जरूरी है, जो बिना किसी भेदभाव के काम करने से ही हासिल होगा।प्रशासनिक कामकाज के दौरान आने वाली चुनौतियों और राजनीतिक-सामाजिक दबावों का जिक्र करते हुए सीएम ने अधिकारियों को भयमुक्त होकर निर्णय लेने की सलाह दी। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “पद अपने साथ अधिकार जरूर लाता है, लेकिन उसमें सेवा का भाव सर्वोपरि होना चाहिए। अधिकारी कानून और जनहित को ध्यान में रखकर स्वतंत्र रूप से फैसले लें।”युवा अफसरों के भविष्य का खाका खींचते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में आप सभी की भूमिकाएं और भी अहम हो जाएंगी। जब देश अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, तब आज नियुक्त हो रहे ये युवा अधिकारी देश और सूबे के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों पर कमान संभाल रहे होंगे।उन्होंने अंत में अधिकारियों से अपील की कि वे अपने पद का अहंकार न पालें, बल्कि खुद को ‘जनता का सेवक’ मानकर काम करें। सरकारी सेवा में आने के बाद अफसरों की असली परीक्षा उनके द्वारा लिए गए जनहित के फैसलों और उनकी जमीनी कार्यशैली से ही होगी।



