newspatnaबिहार

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा शिक्षकों को मिलेगा नियमित वेतनमान, शिक्षा विभाग को अल्टीमेटम!

पटना । बिहार में अनुकंपा के आधार पर बहाल प्रखंड और नगर शिक्षकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को तगड़ा झटका देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अनुकंपा पर बहाल शिक्षकों को नियमित वेतनमान का लाभ हर हाल में मिलेगा। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला अनुकंपा समिति की अनुशंसा में हुई प्रशासनिक देरी का खामियाजा मृत कर्मचारियों के आश्रितों को किसी भी सूरत में नहीं भुगतना पड़ेगा।एकलपीठ ने शिक्षा विभाग के आदेश को किया निरस्तन्यायमूर्ति हरिश कुमार की एकलपीठ ने सुजीत कुमार चौधरी, पंकज कुमार और मनोज कुमार की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। अदालत ने शिक्षा विभाग द्वारा याचिकाकर्ताओं के दावे खारिज करने वाले पूर्व के आदेशों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करार देते हुए सिरे से निरस्त कर दिया है।विदित हो कि याचिकाकर्ताओं के पिता वर्ष 2006 से पूर्व सेवाकाल के दौरान दिवंगत हो गए थे। आश्रितों ने नियमानुसार समय पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन सरकारी स्तर पर लगी रोक और लालफीताशाही के कारण उनकी अनुशंसा में भारी विलंब हुआ और यह 1 जुलाई 2006 के बाद हो सकी। इस प्रशासनिक देरी का नुकसान यह हुआ कि उन्हें नियमित शिक्षक के बजाय निश्चित मानदेय पर प्रखंड एवं नगर शिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों और राज्य सरकार के 12 जनवरी 2018 के विभागीय परामर्श (मेमो-38) का कड़ाई से हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को सरकार नियमित नियुक्ति और वेतनमान का लाभ दे चुकी है, तो इन याचिकाकर्ताओं को इस मौलिक अधिकार से वंचित रखना कतई कानून सम्मत नहीं है। अनुशंसा में देरी पूरी तरह से एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके लिए आश्रितों को दंडित नहीं किया जा सकता।हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्राथमिक शिक्षा निदेशक को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के मामलों पर समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के अनुरूप नए सिरे से विचार किया जाए। अदालत ने अधिकारियों को तीन माह के भीतर नियमित वेतनमान सहित सभी परिणामी लाभ देने पर निर्णय लेने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले को अनुकंपा पर बहाल सूबे के शिक्षकों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

Related Articles

Back to top button