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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जब्त पिस्टलों की होगी फोरेंसिक जांच:

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अब और गहराई से की जाएगी। इस मामले में पुलिस ने एनकाउंटर के दौरान जब्त की गई तीनों पिस्टलों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने तीनों पिस्टल, घटनास्थल से मिले खोखे और अन्य जरूरी सबूतों को विधि-विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेज दिया है।

फोरेंसिक जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटनास्थल पर मिली गोलियां और खोखे किस हथियार से चलाए गए थे। वैज्ञानिक तरीके से होने वाली इस जांच में पिस्टलों और खोखों का बैलिस्टिक मिलान किया जाएगा। इससे यह साफ हो सकेगा कि किस हथियार से कितनी गोलियां चलीं और कौन-सी गोली किस पिस्टल से दागी गई थी। यह जांच पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएगी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में कुल तीन पिस्टल जब्त की गई थीं। इनमें दो सरकारी सर्विस पिस्टल पुलिसकर्मियों की हैं, जबकि एक पिस्टल आरोपी की बताई जा रही है। इन तीनों हथियारों की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे और जांच पूरी तरह तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ सके।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एनकाउंटर के दौरान उस समय शाहपुर थाने के प्रभारी रहे राजेश मालाकार ने अपनी सरकारी सर्विस पिस्टल से एक राउंड फायर किया था। अब एफएसएल की रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि घटनास्थल पर मिला खोखा उसी पिस्टल का है या नहीं। इसके अलावा आरोपी की पिस्टल से भी फायरिंग हुई थी या नहीं, इसकी पुष्टि भी बैलिस्टिक जांच के जरिए होगी।

फोरेंसिक विशेषज्ञ पिस्टलों की बैरल, फायरिंग पिन और अन्य तकनीकी निशानों की जांच करेंगे। हर हथियार से निकलने वाली गोली और खोखे पर कुछ खास निशान बनते हैं। इन्हीं निशानों का मिलान करके यह पता लगाया जाता है कि कौन-सी गोली किस हथियार से चलाई गई थी। इस प्रक्रिया को बैलिस्टिक जांच कहा जाता है और इसे किसी भी गोलीबारी के मामले में सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद एनकाउंटर से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। यदि जांच में सभी तथ्य पुलिस के दावों से मेल खाते हैं तो इससे पूरे घटनाक्रम की पुष्टि होगी। वहीं अगर किसी तरह का अंतर मिलता है तो उसके आधार पर आगे की जांच और कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले पर लोगों की भी नजर बनी हुई है, क्योंकि एनकाउंटर को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में पुलिस भी चाहती है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से हो, ताकि किसी तरह की अफवाह या विवाद की गुंजाइश न रहे।

अब सभी की निगाहें एफएसएल की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि घटनास्थल पर चली गोलियां किस हथियार से दागी गई थीं और एनकाउंटर के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट जांच की दिशा तय करने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई में भी महत्वपूर्ण सबूत साबित होगी।

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