
बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी का चेहरा रहे प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चा तेज है। उनके एक बयान ने सियासी हलकों में हलचल और बढ़ा दी है।
‘तेजस्वी से अब बात करने का कोई मतलब नहीं’
भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट कहा कि अब तेजस्वी यादव से बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह गया है। उनके इस बयान को राजद नेतृत्व से दूरी और पार्टी छोड़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजद में निभाई अहम भूमिका
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक राजद के प्रमुख प्रवक्ता रहे। उन्होंने टीवी डिबेट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विभिन्न राजनीतिक मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की नीतियों का बचाव करने वाले नेताओं में उनकी गिनती होती रही है। आक्रामक शैली और बेबाक बयानबाजी के कारण उन्होंने अलग पहचान बनाई।
भाजपा को मिल सकता है राजनीतिक लाभ
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा लगातार दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में मृत्युंजय तिवारी का पार्टी में शामिल होना भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
बांकीपुर उपचुनाव में निभा सकते हैं भूमिका
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भी सक्रिय जिम्मेदारी दे सकती है। माना जा रहा है कि वे भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में प्रचार अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मृत्युंजय तिवारी कब औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामते हैं और आने वाले चुनावी समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ता है।



