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बिहार बाढ़ पर केंद्र का बड़ा एक्शन: शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में स्थायी समाधान तलाशेगी विशेष टीम!

पटना। बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ की विकराल समस्या को लेकर अब केंद्र सरकार ने सख्त और निर्णायक रुख अपना लिया है। राज्य को अब केवल फौरी राहत के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि इस विभीषिका का स्थायी और दीर्घकालिक समाधान तलाशने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक विशेष उच्च स्तरीय टीम जल्द ही बिहार का सघन दौरा करेगी। प्रधानमंत्री के विशेष निर्देश के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद फोन कर राज्य सरकार को इस महत्वपूर्ण दौरे की जानकारी दी है। माना जा रहा है कि यह केंद्रीय टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों के ग्राउंड जीरो पर जाकर मुआयना करेगी और हर साल होने वाले नुकसान की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को सौंपेगी।

नेपाल का पानी है मुख्य चुनौती

उत्तर बिहार के लिए नेपाल से बेतहाशा आने वाला पानी सबसे बड़ा अभिशाप साबित होता रहा है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद वहां से छोड़े गए पानी से बिहार की नदियों का जलस्तर अचानक और तेजी से बढ़ता है। इसका सबसे पहला और भीषण असर सुपौल जैसे नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है। इसके बाद बाढ़ का यह अनियंत्रित पानी मधुबनी और आसपास के अन्य जिलों को अपनी भयानक चपेट में ले लेता है। देखते ही देखते उत्तर बिहार का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूरा राज्य प्रशासन लगातार इस गंभीर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस बार सारा फोकस केवल नावें चलाने और बचाव कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस जलप्रलय के पीछे के स्थायी कारणों का गहराई से तकनीकी अध्ययन किया जाएगा।

नुकसान का होगा सघन और विस्तृत आकलन

रकार का स्पष्ट मानना है कि इस बार सारा फोकस केवल नावें चलाने और बचाव कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस जलप्रलय के पीछे के स्थायी कारणों का गहराई से तकनीकी अध्ययन किया जाएगा।नुकसान का होगा सघन और विस्तृत आकलन: केंद्र के स्पष्ट निर्देश पर बिहार आ रही यह विशेष टीम नुकसान का बहुआयामी और जमीनी आकलन करेगी। टीम प्रभावित इलाकों का व्यापक दौरा कर यह बारीकी से परखेगी कि इस प्राकृतिक आपदा से राज्य को वास्तविक रूप से कितनी भारी क्षति हुई है। इस सघन जांच के दौरान कृषि भूमि में जलजमाव और किसानों की खड़ी फसलों को हुए व्यापक नुकसान का विस्तृत जायजा लिया जाएगा। इसके साथ ही, दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में उन अनगिनत घरों की भी पहचान कर उनका डेटा तैयार किया जाएगा जो इस बाढ़ के कहर से आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, बाढ़ के तेज बहाव के कारण सड़क, पुल-पुलिया और आवागमन के लिए जरूरी अन्य महत्वपूर्ण सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर की वर्तमान स्थिति का भी गहराई से अध्ययन किया जाएगा। यह केंद्रीय दल विशेष तौर पर यह भी देखेगा कि नदियों के किनारे बने तटबंधों की मौजूदा हालत कैसी है और भविष्य में उन्हें टूटने से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा, आम जनजीवन, विशेषकर गरीब और मजदूर परिवारों की आजीविका पर पड़े विनाशकारी प्रभाव को भी इस विस्तृत रिपोर्ट का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा। बिहार के लिए बाढ़ कोई नई त्रासदी नहीं है। हर साल मानसून आते ही लाखों लोगों को विस्थापन, फसल बर्बादी और घरों के नुकसान के खौफनाक साये में जीना पड़ता है। इस बार केंद्र सरकार की इस त्वरित पहल ने राज्य के लोगों में एक नई उम्मीद जगाई है। यदि इस केंद्रीय टीम की गहन रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ नियंत्रण और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की कोई ठोस महायोजना जमीन पर उतरती है, तो यह हर साल बाढ़ का दंश झेलने वाले बिहार के लाखों बेबस परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की शुरुआत होगी। सूबे के लोगों की निगाहें अब इस टीम के दौरे और उसकी अहम सिफारिशों पर टिकी हैं।

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