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मांझी का बड़ा सियासी हमला, सीट बंटवारे का दर्द छलका, चिराग पर साधा निशाना

पटना के विद्यापति भवन में आयोजित हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) की राज्य परिषद की बैठक में केंद्रीय मंत्री और पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अपने संबोधन के दौरान कई बड़े राजनीतिक बयान दिए। उन्होंने बिना नाम लिए लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान पर तीखा तंज कसा। मांझी ने कहा कि कुछ नेता खुद को दलितों और आरक्षण का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं, लेकिन उनका मकसद केवल सहानुभूति हासिल करना है। उन्होंने कहा, “कुछ लोग नाखून कटाकर शहीद बनने की कोशिश कर रहे हैं”, जबकि दलित समाज की असली समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

अपने भाषण में मांझी ने एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सम्मान नहीं मिला और सीटों के नाम पर केवल “झुनझुना” पकड़ा दिया गया। उन्होंने इशारों में कहा कि कुछ नेताओं ने सरकार पर दबाव बनाकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली।

मांझी ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में संसद के भीतर दलित समाज के मुद्दों को सबसे मजबूती से उठाने वाले नेता चंद्रशेखर आजाद हैं। उनके मुताबिक, दलितों के अधिकारों की आवाज जिस मजबूती से वह उठा रहे हैं, वैसा दूसरा कोई नेता नहीं दिखता।

इस दौरान उन्होंने अपने बेटे और HAM नेता संतोष सुमन को भी मंच से नसीहत दी। मांझी ने कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए मुद्दों की राजनीति करना जरूरी है। अगर पार्टी जनता के सवालों को प्राथमिकता देगी, तो उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

दलित समाज को लेकर भी मांझी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि जातिगत भेदभाव खत्म नहीं हो रहा है, तो लोगों को बौद्ध धर्म अपनाने पर विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और पुलिस की कार्रवाई पर भी राजनीतिक वजहों से सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

एक ही मंच से चिराग पासवान पर तंज, बीजेपी से नाराजगी, चंद्रशेखर आजाद की तारीफ और दलित समाज को लेकर दिए गए बयानों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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