
पटना। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के होटल आवंटन से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले में शनिवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो व पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। हालांकि, अदालत में शनिवार को आरोप तय करने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी, जब आरोपियों के खिलाफ विधिवत आरोप तय किए जाएंगे। ज्ञात हो कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने बीते 10 सितंबर को इस मामले में अहम निर्देश देते हुए कुल 16 आरोपियों में से नौ के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में सात आरोपियों को मामले से डिस्चार्ज (दोषमुक्त) कर दिया गया था। अदालत के इसी पूर्व निर्धारित आदेश के अनुपालन में 3 अक्टूबर को आरोप तय करने की कार्यवाही होनी थी, जिसके लिए लालू परिवार सहित अन्य आरोपी न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए थे।
नौ आरोपियों पर तय होने हैं आरोप
जिन नौ प्रमुख आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप तय किए जाने हैं, उनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स, सुजाता होटल्स और होटल कारोबारी विनय कोचर व विजय कोचर के नाम शामिल हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय का है जब संप्रग (UPA) सरकार में लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लालू यादव के कार्यकाल के दौरान रेलवे के रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों के रखरखाव और संचालन का टेंडर जारी करने में भारी अनियमितताएं बरती गईं। इन होटलों के सब-लीज अधिकार नियमों को ताक पर रखकर विजय और विनय कोचर की कंपनी ‘सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड’ को सौंप दिए गए।
कौड़ियों के भाव मिली करोड़ों की जमीन
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, टेंडर के बदले में ‘क्विड प्रो क्वो’ (लाभ के बदले लाभ) के तहत पटना के एक पॉश इलाके में स्थित करोड़ों की बेशकीमती तीन एकड़ जमीन प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की बेनामी कंपनी के नाम हस्तांतरित की गई। जांच में सामने आया कि बाद में इस कंपनी के शेयर बेहद मामूली कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम कर दिए गए, जिससे जमीन का मालिकाना हक सीधे तौर पर लालू परिवार के पास आ गया।प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में साल 2018 में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें सरकारी पद के दुरुपयोग और धन शोधन का विस्तृत ब्योरा दिया गया था। दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार शुरुआत से ही इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। राजद का आरोप रहा है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। बहरहाल, अब सभी की निगाहें 30 अक्टूबर को होने वाली अदालती कार्यवाही पर टिक गई हैं।



