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रामविलास पासवान और कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की मांग, यूपी-पंजाब में चुनाव लड़ेगी लोजपा

दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने आगामी राजनीतिक और चुनावी एजेंडे का शंखनाद कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। पार्टी अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान के साथ-साथ बहुजन समाज के प्रणेता कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि उनके पिता आदरणीय रामविलास पासवान और कांशीराम जी ने जीवन भर बहुजनों, अनुसूचित जाति और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए कड़ा संघर्ष किया है। इसलिए, पार्टी केंद्र सरकार से उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की पुरजोर मांग करती है।देश की वर्तमान डेमोग्राफी और जरूरतों का हवाला देते हुए लोजपा (आर) ने दो नए आयोग बनाने की वकालत की है।

चिराग पासवान ने कहा कि आज की तारीख में युवाओं से जुड़े मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह देश में महिला आयोग, अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग और अल्पसंख्यक आयोग कार्य कर रहे हैं, ठीक उसी तर्ज पर युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में ‘राष्ट्रीय युवा आयोग’ का गठन होना चाहिए। इसके साथ ही, अन्नदाताओं की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक ‘राष्ट्रीय किसान आयोग’ के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया।राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के विस्तार की रूपरेखा तय करते हुए लोजपा (आर) ने आगामी विधानसभा चुनावों में उतरने का बड़ा ऐलान किया है। चिराग ने स्पष्ट किया कि पार्टी उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी पूरी भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने इस पर औपचारिक फैसला ले लिया है। हालांकि, चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के तहत लड़ा जाएगा या पार्टी बिना गठबंधन के अकेले चुनावी अखाड़े में उतरेगी, इस पर स्थिति आने वाले समय में स्पष्ट की जाएगी। लेकिन यह तय है कि पार्टी इन दोनों राज्यों में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी।इस बैठक के जरिए लोजपा (आर) ने न सिर्फ अपने कोर वोट बैंक को साधने की रणनीति स्पष्ट कर दी है, बल्कि बिहार से बाहर भी अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं।

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