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खुशखबरी! बिहार में बंद पड़ी चीनी मिल होंगी दोबारा चालू

बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को लेकर अब सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। राज्य सरकार इन मिलों को फिर से शुरू करने के लिए तेज़ी से काम कर रही है, जिससे उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस है कि इन बंद मिलों को निजी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं के सहयोग से दोबारा संचालित किया जाए।

इस दिशा में सबसे बड़ा कदम कानून में बदलाव का है। बताया जा रहा है कि बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) अधिनियम 1985 में संशोधन किया जा रहा है। पहले इस कानून के तहत सरकार ही अधिग्रहित मिलों का संचालन करती थी, लेकिन समय के साथ कई मिलें घाटे में जाकर बंद हो गईं। अब संशोधन के बाद इन मिलों को अन्य संस्थाओं को सौंपने का रास्ता खुल जाएगा, जिससे उनके दोबारा चालू होने की संभावना बढ़ेगी।

सरकार की इस पहल से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। बंद मिलों को चालू करने के साथ-साथ नई इकाइयों की स्थापना की योजना भी है, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा।

गन्ना किसानों के लिए भी यह पहल राहत भरी साबित हो सकती है। मिलों के शुरू होने से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर विकल्प मिलेंगे और भुगतान की प्रक्रिया भी आसान होगी। इससे उनकी आमदनी बढ़ने के साथ-साथ खेती के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत होगा।

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