
पटना। बिहार की राजनीति में मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह के लिए मंगलवार बेहद निराशाजनक खबर लाया। वर्ष 2018 के बहुचर्चित हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता छिनना अब पूरी तरह से तय माना जा रहा है।दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने 29 सितंबर 2026 को दिए गए अपने आदेश में विधायक की उस अहम याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा ठहराए गए दोष पर स्टे लगाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, इससे पूर्व जुलाई 2026 में हाईकोर्ट ने राजू सिंह की चार साल की जेल की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत की बड़ी राहत दे दी थी। लेकिन, कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो दोषसिद्धि बरकरार रहने के कारण विधायकी पर मंडरा रहा कानूनी संकट और गहरा गया है।
क्या है जनप्रतिनिधित्व कानून का नियम?
संविधान के जानकारों और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के कड़े प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी भी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में अदालत द्वारा दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदन की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। चूंकि विधायक को चार वर्ष की सजा हुई है और हाईकोर्ट से दोषसिद्धि पर स्टे नहीं मिला है, इसलिए उनका अयोग्य घोषित होना केवल औपचारिकता है। यह पूरा घटनाक्रम 31 दिसंबर 2018 की रात से जुड़ा है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल का जश्न चल रहा था। इसी दौरान विधायक राजू सिंह ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से हर्ष फायरिंग की थी। गोली वहां मौजूद महिला आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी थी, जिनकी अस्पताल में इलाज के दौरान दुखद मौत हो गई। इस घटना ने उस वक्त सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र सहारा
इसी वर्ष जुलाई 2026 में दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (राउज एवेन्यू कोर्ट) ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 (गैर इरादतन हत्या) तथा आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया था। कोर्ट ने उन्हें चार साल के साधारण कारावास और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह भारी भरकम जुर्माना राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दी जानी तय की गई थी। उच्च न्यायालय से यह तगड़ा राजनीतिक और कानूनी झटका लगने के बाद भाजपा विधायक राजू सिंह के पास अब अपनी सदस्यता बहाल कराने और राहत पाने के लिए केवल सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने का ही एकमात्र कानूनी विकल्प शेष बचा है। अब बस सभी को सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार है।



