
बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की रीढ़ माने जाने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दशा अब जल्द ही सुधरने वाली है। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘Goal 2026’ के व्यापक दृष्टिकोण के तहत, स्वास्थ्य मंत्री निशांत के सख्त निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने किराए के भवनों में संचालित होने वाले स्वास्थ्य केंद्रों के मासिक किराए में भारी वृद्धि करने का निर्णय लिया है। लंबे समय से किराए में बढ़ोतरी न होने के कारण इन केंद्रों के सुचारू संचालन में जो बाधाएं आ रही थीं, वे अब दूर हो सकेंगी।
दशकों पुरानी समस्या का हुआ समाधान
इस नई व्यवस्था को धरातल पर पूरी पारदर्शिता से लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत विशेष प्रावधान किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के सभी 38 जिलों को कवर करते हुए कुल 6 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। विभाग की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि इस राशि का उपयोग संबंधित जिला स्वास्थ्य समितियां अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार करेंगी। ‘Diarch GO’ के तहत प्रशासनिक सुधारों को अपनाते हुए, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवंटित धन सीधे तौर पर भवन किराए के भुगतान के लिए ही इस्तेमाल हो।
बुनियादी ढांचे में आएगी क्रांति
स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों की पेंच कसते हुए साफ तौर पर निर्देश दिया है कि भवन मालिकों को हर महीने तय समय पर किराए का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे नियमानुसार हर महीने बिल तैयार करें और महीने के अंतिम दिन तक हर हाल में खर्च की विस्तृत रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति को भेज दें। विभाग ने चेतावनी दी है कि पर्याप्त बजट होने के बावजूद अगर किराए के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ‘NIHER’ के मानकों के अनुरूप वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए, ऐसी कोताही की रिपोर्ट सीधे राज्य मुख्यालय को भेजी जाएगी। राज्य सरकार का यह रणनीतिक निर्णय बिहार के ग्रामीण स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मील का पत्थर साबित होगा। ‘Nsmch’ जैसी संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर स्वास्थ्य सेवाओं को पंचायत स्तर तक ले जाने की मुहिम में यह फैसला उत्प्रेरक का काम करेगा। अब किराए के भवनों में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में कोई अड़चन नहीं आएगी और भवन मालिक भी खुशी-खुशी अपने भवन उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से गांवों, कस्बों और दूर-दराज के इलाकों तक आम जनता को उनके घर के ठीक बगल में त्वरित इलाज मिल सकेगा, जो एक स्वस्थ और सशक्त बिहार के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है।



