
पटना। बिहार में एक बार फिर बाढ़ ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान के कारण राज्य के 12 जिलों में हाहाकार मचा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 70 प्रखंडों की 368 पंचायतों में करीब 22.42 लाख की आबादी बाढ़ की विभीषिका झेल रही है। गंगा किनारे बसे पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बक्सर और मुंगेर जैसे जिलों के निचले इलाकों में पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया है। यातायात बाधित है और जिंदगी नावों के सहारे सिमट गई है। प्रशासन युद्धस्तर पर सामुदायिक रसोई और राहत कार्य चला रहा है। इसी बीच, खेतों में डूबी और बर्बाद हुई फसलों को लेकर राज्य सरकार ने किसानों के लिए ‘कृषि इनपुट अनुदान’ के तहत राहत का खाका तैयार कर लिया है। बाढ़ से तबाह हुई फसल के लिए सरकार आर्थिक मदद देती है, लेकिन इसके लिए सबसे अहम शर्त है 33% नुकसान का नियम। कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं किसानों को मुआवजा मिलेगा, जिनकी खड़ी फसल का कम से कम 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ हो। अगर कृषि समन्वयक द्वारा किए गए जमीनी सर्वे में फसल का नुकसान 33 फीसदी से कम पाया जाता है, तो संबंधित किसान का आवेदन रद्द कर दिया जाएगा।
क्या है 33% नुकसान का अनिवार्य नियम?
बाढ़ से तबाह हुई फसल के लिए सरकार आर्थिक मदद देती है, लेकिन इसके लिए सबसे अहम शर्त है 33% नुकसान का नियम। कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं किसानों को मुआवजा मिलेगा, जिनकी खड़ी फसल का कम से कम 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ हो। अगर कृषि समन्वयक द्वारा किए गए जमीनी सर्वे में फसल का नुकसान 33 फीसदी से कम पाया जाता है, तो संबंधित किसान का आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। सरकार द्वारा अनुदान की राशि जमीन और फसल की प्रकृति के आधार पर तय की गई है। एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर रकबे के लिए ही यह सहायता दी जाएगी, जिसके निर्धारित स्लैब इस प्रकार हैं: शाश्वत/बहुवर्षीय फसलें: ₹22,500 प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान तय है, जिसके तहत अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ₹45,000 का मुआवजा दिया जाएगा।सिंचित (Irrigated) भूमि: ₹17,000 प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान तय है, जिसके तहत अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ₹34,000 का मुआवजा दिया जाएगा।असिंचित (Rain-fed) भूमि: ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान तय है, जिसके तहत अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ₹17,000 का मुआवजा दिया जाएगा।
राहत कार्यों के साथ-साथ पोर्टल खुलने का इंतजार
एक तरफ प्रशासन प्रभावित परिवारों तक सुरक्षित पेयजल, दवाइयां और भोजन पहुंचाने के लिए सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जलस्तर घटने के बाद नुकसान के आकलन की तैयारी है।किसानों को यह मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भेजा जाएगा। इसके लिए किसान का कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल (dbtagriculture.bihar.gov.in) पर पंजीकृत होना और बैंक खाते का आधार से लिंक होना अनिवार्य है। खास बात यह है कि अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों (रैयत) के साथ-साथ बटाईदार (गैर-रैयत) भी स्व-घोषणा पत्र के आधार पर मुआवजे का दावा कर सकेंगे। जैसे ही आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रभावित पंचायतों की अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी, किसान डीबीटी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।



