
पटना। बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। आगामी विधान परिषद की आठ स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर होने वाले चुनावों को लेकर एनडीए (NDA) पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए विधायक दल की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। बैठक का मुख्य एजेंडा चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना और सभी आठ सीटों पर जीत सुनिश्चित करना है।बैठक से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने दो टूक कहा कि एनडीए गठबंधन इन चुनावों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और सारण सीट को लेकर घटक दलों के बीच कुछ आंतरिक खींचतान चल रही है, जिसे सुलझाने के लिए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण पर बिहार का कड़ा रुख
संजय झा ने केवल विधान परिषद चुनावों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच के सबसे संवेदनशील जल समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार के हितों और राज्य की जल जरूरतों के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।उन्होंने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच 30 साल पुरानी फरक्का जलसंधि की अवधि आगामी 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रही है। ऐसे में, इस संधि के नवीनीकरण से बिहार के जल संसाधनों और हितों पर जो गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं, उस पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। जदयू इस मुद्दे को लेकर राज्यभर में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम भी चला रहा है। संजय झा ने यह भी बताया कि हाल ही में दिल्ली में नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर बिहार के इन महत्वपूर्ण हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस पर निशाना
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी द्वारा दिल्ली में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी संजय झा ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया की शुरुआत बिहार से ही हुई थी और इसे चुनौती देने वाली तमाम याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।संजय झा ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाना, अन्यत्र जा चुके लोगों के नामों की समीक्षा करना और दोहरी प्रविष्टियों को ठीक करना एक सामान्य और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग और उसकी कार्यप्रणाली पर कभी सवाल नहीं उठाते, लेकिन हार का सामना करते ही इन्हीं संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने लगते हैं। विधान परिषद चुनाव के मतदान आगामी 23 अक्टूबर को होने हैं। ऐसे में एनडीए विधायक दल की इस बैठक के जरिए घटक दलों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने और विपक्ष के हर हमले का आक्रामक जवाब देने की रणनीति तैयार की जा रही है। फरक्का जलसंधि और एसआईआर जैसे मुद्दों ने आने वाले दिनों में राज्य की सियासत को और अधिक गरमाने के पूरे संकेत दे दिए हैं।



