कोसी का रौद्र रूप: मदरोनी में छतों पर कट रही जिंदगी, सरकारी मदद की बाट जोह रहे बाढ़ पीड़ित
घरों में लगातार कई दिनों से पानी भरा होने के कारण परिवार अपनी छतों पर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।

पटना। कोसी नदी का उफान एक बार फिर भागलपुर के मदरोनी इलाके के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने पूरे इलाके को जलमग्न कर दिया है और बाढ़ की स्थिति गंभीर रूप धारण कर चुकी है। हालात इस कदर भयावह हैं कि ग्रामीण अपना घर-बार छोड़कर अपनी ही छतों पर शरण लेने को विवश हैं। पिछले कई दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे होने के बावजूद अब तक सरकारी इमदाद नहीं पहुंचने से प्रभावित परिवारों में त्राहिमाम मचा हुआ है। बाढ़ के इस तांडव ने लोगों की सामान्य दिनचर्या को पूरी तरह से निगल लिया है। घरों के भीतर कमर तक पानी भरा है, जिससे लोगों के चूल्हे बुझ गए हैं और घर में रखा अनाज भीग कर बर्बाद हो चुका है। सबसे ज्यादा फजीहत बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की हो रही है। पीने के साफ पानी और दो वक्त की रोटी के लिए लोग तरस रहे हैं। लगातार जलजमाव के कारण गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी दवाएं दूर-दूर तक मयस्सर नहीं हैं। रात के अंधेरे में विषैले जीव-जंतुओं का खौफ भी लोगों की नींद उड़ा रहा है।
बुनियादी सुविधाओं का भारी टोटा
मदरोनी के ग्रामीण अपने आशियाने को डूबता देख बेबस हैं। सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए नावों की भारी कमी है, इसलिए उन्होंने अपनी छतों को ही अपना ठिकाना बना लिया है। कड़ी धूप और रात की नमी के बीच जैसे-तैसे जिंदगियां कट रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का दर्द छलक कर सामने आ रहा है। उनका कहना है कि कोसी हर साल इसी तरह तबाही मचाती है, लेकिन प्रशासनिक अमला सिर्फ कागजी दावों और खानापूर्ति तक सीमित रहता है। धरातल पर राहत के नाम पर अब तक कुछ खास नहीं पहुंचा है। एक तरफ जहां सरकारी मशीनरी की सुस्ती और लापरवाही से बाढ़ पीड़ितों में भारी आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर संकट की इस घड़ी में कुछ स्थानीय समाजसेवी फरिश्ता बनकर सामने आए हैं। प्रशासनिक विफलता के बीच ये समाजसेवी अपने स्तर से सूखा राशन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामग्री बांटने में जुटे हुए हैं। हालांकि, तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि व्यक्तिगत प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। पीड़ितों का साफ कहना है कि जब तक युद्धस्तर पर सरकारी राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं होता, तब तक हालात सुधरने वाले नहीं हैं।
प्रशासनिक सुस्ती के बीच समाजसेवियों ने संभाला मोर्चा
मदरोनी में कोसी का लगातार बढ़ता जलस्तर हुक्मरानों से सवाल पूछ रहा है कि आखिर आपदा के समय ही प्रशासन की नींद क्यों टूटती है? छतों पर सिसकती ये जिंदगियां अब भी उम्मीद भरी नजरों से देख रही हैं कि उनके हिस्से की सरकारी मदद आखिर कब उन तक पहुंचेगी।



