
पटना। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए पटना हाईकोर्ट से एक बेहद अहम और राहत भरी खबर सामने आई है। पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार महज तकनीकी खामियों और कागजी बहानेबाजी का हवाला देकर कोरोना मृतकों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे से उन्हें वंचित नहीं कर सकती। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवारों को ‘बिहार कोविड-19 सहायता योजना 2022’ के तहत चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।यह पूरा मामला पटना जिले के मोकामा और मरांची इलाके से जुड़ा हुआ है। इन क्षेत्रों के निवासी अनीश सिंह सहित सात अन्य पीड़ितों के परिजनों ने प्रशासनिक फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके परिजनों की मौत अप्रैल-मई 2021 के दौरान आई कोरोना की दूसरी और सबसे घातक लहर में हुई थी। अपनों को खोने के बाद इन परिवारों ने सरकार से चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए उनके आवेदनों को रद्द कर दिया।
पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
हैरानी की बात यह रही कि राज्य स्वास्थ्य समिति की अपनी आधिकारिक सूची में इन सभी आठ लोगों की मौत का कारण कोरोना वायरस ही दर्ज था और मौत के कारणों पर किसी भी स्तर पर कोई विवाद नहीं था। इसके बावजूद, सिविल सर्जन और राज्य स्तरीय कमेटी ने इन दावों को सिर्फ इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि मृतकों का कोविड टेस्ट मोकामा की ऐसी लैब में कराया गया था, जो सरकार द्वारा औपचारिक रूप से ‘अधिसूचित’ या अधिकृत नहीं थी।इस मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट में जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने सरकार की इस तकनीकी दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि अप्रैल-मई 2021 के उस भयावह और अफरातफरी वाले दौर में, जब लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब मरीजों या उनके बदहवास परिजनों से यह उम्मीद कतई नहीं की जा सकती कि वे पहले सरकारी वेबसाइट खंगाल कर अधिकृत लैब खोजें और फिर जांच कराने के लिए मीलों दूर की यात्रा करें।
अमानवीय है सरकार का रवैया
न्यायालय ने राज्य सरकार को उसके कर्तव्यों की याद दिलाते हुए सख्त टिप्पणी की कि राज्य महज एक मूकदर्शक नहीं हो सकता, बल्कि वह अपने नागरिकों के कल्याण का संरक्षक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को केवल तकनीकी आधार पर उसके संवैधानिक और नीतिगत अधिकारों से महरूम नहीं किया जा सकता।अपने फैसले में पटना हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर सभी आठ याचिकाकर्ताओं के दावों पर गंभीरता से पुनर्विचार करें। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पात्रता तय होने के बाद अगले चार सप्ताह के भीतर ‘बिहार कोविड सहायता योजना 2022’ के तहत इन परिवारों को 4-4 लाख रुपये की मुआवजा राशि का शत-प्रतिशत भुगतान किया जाए। इस फैसले से उन तमाम परिवारों में एक नई उम्मीद जगी है, जिनके दावे तकनीकी पचड़ों में उलझाकर खारिज कर दिए गए थे।



