
पटना। रिश्तों की जटिलता और आर्थिक लाभ की लालसा किस कदर इंसानी भावनाओं पर हावी हो सकती है, इसका एक हैरान करने वाला मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा है। एक नाबालिग बच्ची की कस्टडी (अभिरक्षा) को लेकर दो अलग-अलग व्यक्तियों ने खुद को उसका सगा पिता बताते हुए अदालत में दावा ठोक दिया है। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने बच्ची को तत्काल प्रभाव से मधुबनी के ‘चाइल्ड केयर होम’ (बाल गृह) में भेजने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, सच सामने लाने के लिए कोर्ट ने बच्ची सहित उस पर दावा करने वाले दोनों कथित पिताओं का डीएनए (DNA) टेस्ट कराने का ऐतिहासिक निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने इस पेचीदा मामले की सुनवाई करते हुए कई अहम आदेश पारित किए।
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?
अदालत के समक्ष पेश की गई जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद मधुबनी जिले के डेलडीहा पूर्वी +2 उच्च विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका पूजा कुमारी की दुखद मौत के बाद शुरू हुआ। बीते 9 जून 2026 को एक दर्दनाक सड़क हादसे में पूजा का निधन हो गया था। इस दुर्घटना के संबंध में ट्रैफिक थाने में कांड संख्या 105/2026 दर्ज है। बताया जाता है कि शिक्षिका अपनी नाबालिग बेटी के साथ राकेश कुमार सिंह नामक व्यक्ति के मकान में किराए पर रहती थीं। आरोप है कि पूजा की मौत के बाद राकेश कुमार सिंह ने मृतका के असली परिजनों को सूचना दिए बिना ही जल्दबाजी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया। अब वह व्यक्ति मृतका को अपनी पत्नी बताकर उसकी सरकारी नौकरी से जुड़े तमाम लाभों पर दावा पेश कर रहा है।
बैंक मैनेजर ने पेश किए अदालत में ठोस सबूत
मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब मुंबई स्थित केनरा बैंक में कार्यरत सीनियर मैनेजर राघवेंद्र कुमार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने एक विस्तृत हलफनामा दायर कर दावा किया कि शिक्षिका पूजा उनकी कानूनी पत्नी थीं। राघवेंद्र के अनुसार, उनकी शादी 22 अप्रैल 2015 को हुई थी। इसके बाद 8 फरवरी 2016 को समस्तीपुर के कृष्णा अस्पताल में उनकी बेटी का जन्म हुआ। अपने दावे को पुख्ता करने के लिए राघवेंद्र ने अदालत के पटल पर बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र, शादी की तस्वीरें और बेटी के नाम से चल रही ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ की पासबुक पेश की। इस खाते में वर्तमान में लगभग 11 लाख रुपये जमा हैं, जो एक पिता के तौर पर उनके दायित्व को दर्शाता है। दूसरी तरफ, कस्टडी और मृतका की संपत्ति पर दावा करने वाले राकेश कुमार सिंह की कहानी अदालत में बेहद कमजोर नजर आई। राकेश का दावा है कि उसकी शादी साल 2014 में ही पूजा से हो गई थी, लेकिन महज चार-पांच महीने बाद ही पूजा ने राघवेंद्र से शादी रचा ली। हालांकि, जब हाईकोर्ट ने राकेश से शादी के पुख्ता प्रमाण मांगे, तो वह कोई वैध प्रमाणपत्र पेश नहीं कर सका। सबूत के नाम पर उसने केवल एक मंदिर की 1100 रुपये की हस्तलिखित रसीद अदालत को दिखाई।



