
भागलपुर। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सत्ता पक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। भागलपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के ‘बेचारा’ वाले तंज का कड़ा जवाब दिया। पीके ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वह पहली बार मुख्यमंत्री की बात से पूरी तरह सहमत हैं, क्योंकि ‘बेचारा’ का सीधा अर्थ होता है— जिसके पास कोई चारा न बचा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके और जन सुराज से जुड़े लाखों कार्यकर्ताओं के पास बिहार को संवारने और बदलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प या चारा नहीं बचा है। प्रशांत किशोर ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वे बिहार को अनपढ़ और आपराधिक छवि वाले नेताओं के रहमोकरम पर छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं। जब तक राज्य की दशा और दिशा में बुनियादी सुधार नहीं हो जाता, उनका यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने सत्ताधारी दल के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि जनता के बुनियादी हकों की अनदेखी कर राज्य को गलत हाथों में धकेल दिया गया है।
‘अनपढ़ और अपराधियों के भरोसे नहीं छोड़ सकते राज्य’
जदयू का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ किए जाने संबंधी राजनीतिक चर्चाओं पर चुटकी लेते हुए पीके ने बड़ा सियासी दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का नाम चाहे जो रख लें, सच्चाई यह है कि जदयू को अब नीतीश कुमार नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चला रहे हैं। संगठन के भीतर केवल दिखावे के चेहरे रह गए हैं, जबकि सारे राजनीतिक फैसले दिल्ली से तय हो रहे हैं। प्रशांत किशोर इन दिनों आगामी विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर पूरे राज्य में सघन संगठनात्मक दौरे कर रहे हैं। भागलपुर में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, स्थानीय प्रबुद्धजनों और संभावित प्रत्याशियों के साथ मैराथन बैठकें कीं। उन्होंने बताया कि जन सुराज वैज्ञानिक सर्वे और जमीनी फीडबैक के आधार पर ही अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर रहा है।
विधान परिषद चुनाव की जमीन तैयार करने में जुटा जन सुराज
पीके ने चुनावी नैरेटिव पर बात करते हुए आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में धनबल और झूठे वादों के सहारे जनता को गुमराह किया गया। सत्ता पाने के बाद भाजपा ने शिक्षा और रोजगार की चर्चा बंद कर एनकाउंटर, जातिगत ध्रुवीकरण और अपराध की राजनीति को हवा दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब राज्य का मिजाज बदल चुका है। आने वाले समय में चाहे विधायक किसी भी दल का हो, जनता जाति के नाम पर नहीं, बल्कि स्कूल, अस्पताल और रोजगार के सवाल पर हिसाब मांगेगी। जन सुराज इसी एजेंडे पर अडिग रहकर सियासी बदलाव लाएगा।



