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जिला पार्षद पति की सरेआम भूनकर हत्या, आक्रोशित भीड़ ने एसपी की गाड़ी समेत तोड़े आधा दर्जन पुलिस वाहन

आक्रोशित भीड़ ने एसपी की गाड़ी समेत तोड़े आधा दर्जन पुलिस वाहन

सीतामढ़ी। जिले के डुमरा थाना क्षेत्र स्थित केथरिया गांव शनिवार को गोलियों की तड़तड़ाहट और उपद्रवियों के तांडव से दहल उठा। बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े जिला पार्षद सदस्य खुशी देवी के पति बैद्यनाथ महतो की सरेआम गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया। हत्या से भड़के ग्रामीणों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूटा, जिसके बाद उग्र भीड़ ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर बवाल काटा। आक्रोशित लोगों ने सीतामढ़ी एसपी अमित रंजन के वाहन, डुमरा व टाउन थाना की जीप समेत करीब आधा दर्जन पुलिस गाड़ियों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और एक पुलिस वाहन को सड़क पर पलट दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैद्यनाथ महतो शनिवार सुबह किसी निजी काम से अपने घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान, पहले से घात लगाए बैठे हथियारबंद अपराधियों ने उन्हें रास्ते में घेर लिया और उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए इस जानलेवा हमले में बैद्यनाथ महतो को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। ताबड़तोड़ गोलियां लगने के कारण खून से लथपथ महतो ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी हवा में हथियार लहराते हुए बड़े आराम से फरार हो गए।

घात लगाए बैठे थे शूटर, मौका मिलते ही बरसाईं गोलियां

गोलीबारी की गूंज सुनते ही भारी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। खून से सना शव देखते ही लोगों का धैर्य जवाब दे गया और वे उग्र हो गए। घटना की सूचना पाकर जब तक डुमरा और टाउन थाना की पुलिस मौके पर पहुंचती, भीड़ बेकाबू हो चुकी थी। उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर सीधा हमला बोल दिया। देखते ही देखते पुलिस वाहनों के शीशे चकनाचूर कर दिए गए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाकर वहां से पीछे हटना पड़ा। इस भारी हंगामे और पथराव के बीच यातायात थाना प्रभारी प्रशांत कुमार और इंस्पेक्टर अनिल कुमार के घायल होने की खबर है। इस खूनी खेल के पीछे पुलिस महकमे की बड़ी लापरवाही उजागर हो रही है। स्थानीय लोगों और परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि महज 15 दिन पहले, 28 अगस्त को भी बैद्यनाथ महतो की जान लेने की नीयत से उन पर फायरिंग की गई थी। उस खौफनाक वारदात के बाद महतो ने थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी और अपनी जान को खतरा बताया था। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस ने उस समय त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया होता, तो आज यह जघन्य हत्याकांड नहीं होता। लोगों में इसी बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस की सुस्ती और कथित मिलीभगत के कारण बैद्यनाथ को अपनी जान गंवानी पड़ी।

छावनी में तब्दील हुआ केथरिया गांव

हत्या और पुलिस पर हमले की सूचना मिलते ही जिला मुख्यालय से भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल और दंगा नियंत्रण दस्ते को गांव में तैनात कर दिया गया है। फिलहाल, पूरे इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं और उपद्रवियों के साथ-साथ हत्यारों की धरपकड़ के लिए सघन छापेमारी अभियान शुरू कर दिया गया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गहन तफ्तीश में जुट गई है।

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