
पटना। बिहार में गंगा समेत राज्य की कई प्रमुख नदियों ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदियों के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि से बाढ़ का खतरा अब बेहद गंभीर हो गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी ने 2016 के अपने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर लिया है। आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गए हैं। स्थिति की समीक्षा के लिए उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पटना में विभागीय अधिकारियों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की। बैठक में सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को विशेष सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। तटबंधों के आस-पास बसे इलाकों में जिलास्तर पर गठित टीमों को लगातार गश्त करने, प्रभावित लोगों को स्थिति की जानकारी देने और पल-पल का अपडेट साझा करने को कहा गया है। डिप्टी सीएम ने बयान जारी कर बताया कि सुबह 10:30 बजे गंगा ने अपने 2016 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर स्थान पर अधिकारी मुस्तैद हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।
उपमुख्यमंत्री ने की उच्चस्तरीय समीक्षा
राज्य में जल प्रलय की स्थिति पैदा करने वाली नदियां कई जिलों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और प्रशासन इन इलाकों में लगातार निगरानी कर रहा है। गंगा नदी दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में लाल निशान के पार जा चुकी है। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में उफान पर है, जबकि कोसी बलतारा और कुर्सैला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा बूढ़ी गंडक खगड़िया में, पुनपुन श्रीपालपुर में और घाघरा नदी दरौली में जलस्तर के खतरे के निशान को पार कर गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रभावित परिवारों के लिए युद्धस्तर पर राहत सामग्री और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षित आवागमन और निकासी सुनिश्चित करने के लिए राज्य भर में कुल 693 सरकारी नावों का परिचालन शुरू कर दिया गया है। इनमें सबसे अधिक 155 नावें वैशाली में, 88 समस्तीपुर में, 87 भोजपुर में और 70 नावें पटना में उतारी गई हैं। खगड़िया, मधेपुरा और पूर्णिया में भी जरूरत के हिसाब से नावों की व्यवस्था की गई है।
राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी
राहत और बचाव कार्यों के तहत अलग-अलग जिलों में प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। भोजपुर जिले के चार प्रखंडों की करीब 2.84 लाख प्रभावित आबादी के लिए 13 सामुदायिक रसोई केंद्र सक्रिय कर दिए गए हैं। राजधानी पटना के नौ प्रखंडों में करीब 2.32 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है, जिनके लिए 15 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं, जिनमें आठ पुरानी और सात नई रसोई शामिल हैं। वहीं, वैशाली जिले में लगभग 85 हजार की आबादी प्रभावित हुई है, जहां विशेष राहत शिविर स्थापित कर 326 लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। सारण जिले में भी करीब 20 हजार प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई का लगातार संचालन किया जा रहा है। भागलपुर में प्रभावित करीब पांच हजार लोगों के लिए छह रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक 70,600 से अधिक थाली भोजन वितरित किया जा चुका है।इसके अतिरिक्त अरवल, बक्सर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, और कटिहार समेत अन्य प्रभावित जिलों में भी स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है और राहत सामग्री बांट रहा है। नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।



