
पटना। राजधानी पटना और उसके आसपास के इलाकों में गंगा और पुनपुन नदियों ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दोनों नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने दोहरे प्रहार की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे जिला प्रशासन के साथ-साथ आम जनजीवन में दहशत का माहौल है। गंगा कई स्थानों पर अपने ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) को छूने को बेताब है, वहीं पुनपुन के उफान से निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है।गांधीघाट, हाथीदह और मनेर में गंगा का जलस्तर लगातार लाल निशान से ऊपर बना हुआ है। पुराने बाढ़ रिकॉर्ड के टूटने का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने 31 अतिसंवेदनशील और 181 संवेदनशील जगहों पर चौकसी तेज कर दी है। सुरक्षा दीवार के सभी 108 रास्तों और 13 स्लुइस गेटों के लीकेज को युद्धस्तर पर बंद कराया गया है।
खतरे के निशान से ऊपर उफनती नदियां
गांधीघाट (गंगा): खतरे के निशान से 1.79 मीटर ऊपर (उच्चतम रिकॉर्ड से मात्र 13 सेमी नीचे)।हाथीदह (गंगा): खतरे के निशान से 1.56 मीटर ऊपर (उच्चतम रिकॉर्ड से 20 सेमी नीचे)।मनेर (गंगा): खतरे के निशान से 1.52 मीटर ऊपर (उच्चतम रिकॉर्ड से 27 सेमी नीचे)।दीघा घाट (गंगा): खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर।श्रीपालपुर (पुनपुन): खतरे के निशान से 2.63 मीटर ऊपर।फल्गु की सहायक महतमाइन और लोकाइन नदियों के दबाव से दनियावां प्रखंड में किसमिरिया गांव के पास जमींदारी बांध टूट गया है। इसके चलते किसमिरिया, चकरजा, मुड़ेरा और मकसूदपुर समेत कई गांवों के खेतों में पानी फैल गया है और लगभग 400 एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह डूब गई है। आक्रोशित ग्रामीणों और किसानों ने बिहटा-सरमेरा एसएच-78 को लगभग डेढ़ घंटे तक जाम रखा। जिलाधिकारी ने टूटे तटबंध की तुरंत मरम्मत के निर्देश दिए हैं।दानापुर के देवनानाला में पानी खतरे के निशान से चार फीट ऊपर बह रहा है, जिससे दियारा क्षेत्र की छह पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। स्कूल, मंदिर और स्वास्थ्य केंद्र जलमग्न हो चुके हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर शुरू कर दिया है, जहां 500 से अधिक लोगों ने भोजन किया। दूसरी ओर, मोकामा के जंजीरा और कसहा दियारा समेत निचले इलाकों में पानी फैलने के बाद प्रशासन ने गंगा स्नान पर अगले आदेश तक पूर्ण रोक लगा दी है।राहत की बात केवल इतनी है कि पिछले कुछ घंटों में जलस्तर बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। फिर भी नदियां उफान पर हैं और अगले 24 से 48 घंटे पटना के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।



