
पटना। पटना उच्च न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना (धारा 498A) से जुड़े एक मामले में बड़ा कानूनी सिद्धांत तय करते हुए आरोपी पति को बड़ी राहत दी है। जस्टिस राज कुमार की पीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को जमानत देने के एवज में पत्नी को गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) देने की शर्त थोपना पूरी तरह से अवैध और अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर है। अदालत के इस आदेश के बाद पिछले सात महीने से जेल में बंद आरोपी पति अमरजीत कुमार को जमानत मिल गई है।
रोहतास से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला रोहतास जिले का है (शिकायत वाद सं. 478/2023)। पत्नी दुर्गावती कुमारी ने अपने पति अमरजीत कुमार पर पल्सर मोटरसाइकिल और सोने की चेन की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया था। इसी मामले में आरोपी पति 12 फरवरी, 2026 से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था और उसने हाईकोर्ट में जमानत की गुहार लगाई थी।
दोनों कानूनी प्रक्रियाएं बिल्कुल अलग
सुनवाई के दौरान पत्नी के अधिवक्ता ने उसकी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए अदालत से मांग की थी कि जमानत के साथ अंतरिम मेंटेनेंस भी तय किया जाए। इस पर जस्टिस राज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दहेज उत्पीड़न (धारा 498A) और भरण-पोषण (CrPC की धारा 125) की कार्यवाही बिल्कुल अलग-अलग हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए गुजारे भत्ते के भुगतान को रिहाई की शर्त नहीं बनाया जा सकता।
तीन सप्ताह में फैमिली कोर्ट में पेश होने का निर्देश
हाईकोर्ट ने अमरजीत कुमार को 10,000 रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों की शर्त पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि, पत्नी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने पति को सख्त निर्देश दिया है कि वह जेल से रिहा होने के तीन सप्ताह के भीतर सासाराम स्थित फैमिली कोर्ट में चल रहे मेंटेनेंस केस में अनिवार्य रूप से उपस्थित हो। इसके साथ ही, अदालत ने फैमिली कोर्ट को भी निर्देश दिया है कि वह भरण-पोषण के इस मामले का त्वरित निपटारा करे।



