
पटना। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को आरक्षण की समीक्षा पर अनावश्यक बयानबाजी करने के बजाय बिहार में बढ़ती बेरोजगारी, पलायन और बाढ़ जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सहनी ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर सवाल खड़े किए।
बाढ़ को लेकर सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
सहनी ने कहा कि मिथिला और कोसी क्षेत्र के लोग हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर हैं। नेपाल में बारिश का सीधा कहर बिहार पर टूटता है। पिछले 50 वर्षों से बाढ़ नियंत्रण की नीतियां केवल कागजों पर बन रही हैं, लेकिन कोसी से जुड़ी अहम परियोजना आज भी अटकी पड़ी है। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में वीआईपी को सत्ता में आने का मौका मिला तो बिहार को बाढ़ से स्थायी मुक्ति दिलाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
मूल मुद्दों से भटकाने की हो रही कोशिश
आरक्षण की समीक्षा के मुद्दे पर वीआईपी प्रमुख ने कहा कि यह समाज में अकारण तनाव पैदा करने और असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति है। बिहार का युवा बेरोजगार है और दो जून की रोटी के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहा है। सरकार महिलाओं को दो लाख रुपये देने के अपने वादे पर भी मौन साधे हुए है।
जीडीपी के दावों पर किया कटाक्ष
7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर के दावों पर सवाल उठाते हुए सहनी ने कहा कि अगर देश की अर्थव्यवस्था इतनी ही मजबूत है, तो आम आदमी महंगाई से क्यों जूझ रहा है? डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और आर्थिक चुनौतियां एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही हैं। सरकार को केवल आंकड़ों की बाजीगरी करने के बजाय आम लोगों की आय और रोजगार बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
चिराग की सुरक्षा हो सुनिश्चित
सांसद चिराग पासवान को मिली कथित धमकी के मामले में सहनी ने सरकार से इसे गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने मांग की कि इस मामले की गहराई से जांच हो और यह पता लगाया जाए कि धमकी के पीछे कौन है, साथ ही उनकी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए।
चुनाव और गठबंधन पर स्पष्ट किया रुख
गठबंधन के सवाल पर सहनी ने साफ किया कि वीआईपी फिलहाल ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A) ब्लॉक का हिस्सा है। पार्टी उत्तर प्रदेश में अपना ‘संकल्प अभियान’ चला रही है, जो नवंबर तक जारी रहेगा। उन्होंने एनडीए नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे समाज के हकों के लिए लड़ें। यदि वे समय रहते जनता के मुद्दों पर नहीं लौटे, तो वीआईपी चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। संगठन को लगातार धार दी जा रही है।



