newspatnaबिहार

खुद की लापरवाही का फायदा नहीं उठा सकते अफसर: हाईकोर्ट का ‘गायब फाइलों’ पर बड़ा फैसला

पटना। सरकारी दफ्तरों में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी पर ‘फाइल गायब होने’ या ‘दस्तावेज फटे होने’ का बहाना अब नहीं चलेगा। पटना हाईकोर्ट ने राज्य के प्रशासनिक महकमे और लापरवाह अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी विभाग रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में अपनी ही विफलता और लापरवाही का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत का यह अहम फैसला उन आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें अक्सर ऐसे बहानों से सूचना देने से वंचित कर दिया जाता है।जस्टिस राज कुमार की एकलपीठ ने सीवान जिले के मोहम्मद रिजवान की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि कोई मूल रिकॉर्ड कार्यालय से गायब हो गया है, तो यह संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि वह उपलब्ध अन्य राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर उसका पुनर्निर्माण करे। अदालत ने सीवान जिला प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर अंचल कार्यालय, भूमि सुधार उपसमाहर्ता कार्यालय और जिला अभिलेखागार में रिकॉर्ड की भौतिक तलाश करे।

यदि वहां दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित करने या विशेषज्ञों की मदद से तैयार कर आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।दरअसल, याचिकाकर्ता ने सीवान सदर अंचल से भूमि विवाद और बंटवारे के मुकदमों में अहम माने जाने वाले ‘बरवड़ा रजिस्टर’ और ‘रजिस्टर-2’ की प्रमाणित प्रति मांगी थी। लेकिन, संबंधित अधिकारियों ने मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और दस्तावेजों के अपठनीय होने का हवाला देकर सूचना देने से साफ इनकार कर दिया था। अदालत ने अधिकारियों के इस रवैये को विरोधाभासी और हास्यास्पद बताते हुए इसे आरटीआई कानून की मूल भावना के विपरीत माना।इस मामले में हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2012 को राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश और 28 जून 2011 को लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिए गए इनकार के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में याद दिलाया कि सार्वजनिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखना अधिकारियों का प्राथमिक और वैधानिक दायित्व है। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरटीआई की दूसरी अपील का निस्तारण बिना किसी ठोस कारण के टाला नहीं जा सकता और इसका निपटारा हर हाल में 30 से अधिकतम 45 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए।

Related Articles

Back to top button